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Wednesday, April 29, 2009

'भड़ास फॉर यूपी' के व्यवस्थापक पद हेतु आवेदन

प्रिय पाठकों और सदस्यों ! मैं (सलीम खान) बड़े खेद के साथ यह सुचना देना चाहता हूँ की इस ब्लॉग (भड़ास फॉर यूपी) को मैं समयाभाव के कारण उचित ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ. यह ब्लॉग यूँ ही सुचारू रूप से चले इसके लिए मैं आप सभी से यह कहना चाहता हूँ कि अगर आपको लगता है कि आप इस मंच को ठीक उसी तरह से सेवा कर सकेंगे जैसा कि मैं करता आया हूँ तो आप मुझे swachchhsandesh@gmail.com पर अपने बायोडाटा के साथ मेल कर दें | आप यह ज़रूर बताएं कि आप अंतरजाल पर रोज़ कितना समय देते है और आपका प्रोफेशन क्या है| 

अपनी एक पासपोर्ट साइज़ फोटो और मोबाइल नंबर को मेल करते वक़्त देना ना भूलें |  

आपकी मेल के मिलने के एक सप्ताह के भीतर चयन होने की सुचना दे दी जायेगी| हालाँकि भड़ास फॉर यूपी पर एकल व्यवस्थापक की ही आवश्यकता है, परन्तु अगर एक से अधिक उम्मीदवार चयनित हो जाते है तो व्यवस्थापक मंडल का निर्माण किया जायेगा जिसके लिए नियम व शर्तें लागु होंगी और इस ब्लॉग पर शीग्र ही प्रकाशित की जायेंगी |  

आपका  
सलीम खान

Thursday, April 16, 2009

अब न रहा वो सद्दाम का इराक !


पश्चिमी मिडिया में लगातार छपी खोजी रपटों से मार्डेन हिस्ट्री की जघन्यतम हत्या की सच्चाई छन छन कर सुर्खियों में आई थी | जार्ज वाकर बुश, जो अब राष्ट्रपति नहीं रहे, ने विश्व बिरादरी से झूठ बोला था कि इराक के दिवंगत राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन (जिन्हें शहीद कर दिया गया था) नरसंहार के भयावह शस्त्रों के उत्पादन में जुटे थे | अमेरिका के वर्तमान रष्ट्रपति बराक़ हुसैन ओबामा ने चुनाव के समय यह कहा था कि उनके प्रतिद्वंदी जान मैक्कन की रिपब्लिकन पार्टी झूठ के पहाड़ पर खड़ी हुई है और अमेरिका की जनता ही इसका जवाब देगी | हुआ भी यही चुनाव के बाद की तस्वीर साफ़ है, अब वहां बुश की पार्टी हाशिये पर आ गयी और इसी के चलते बुश से पहले ब्रितानिया हुकुमत टोनी ब्लेयर के हाथो से निकल गयी और टोनी ब्लेयर को इराक पर गुमराह करने करने के कारण ही ब्रिटेन के प्रधानमत्री का पद छोड़ना पड़ा | उधर अमेरिका में मुस्लिम से ईसाई बने बराक हुसैन ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने लेकिन विश्व बिरादरी को ज्यादा खुश होने की ज़रुरत नहीं है कि बराक ओबामा के अमेरिका का राष्ट्रपति बन गए हैं| 
बुश का जो हाल हुआ वो तो होना ही था, इराकी पत्रकार ने जूता मारकर उनकी औकात बता दी | इतिहास के कठघरे में बुश अभियुक्त बन कर पेश होंगे, जब इराक पर अमेरिकी नरसंहार की खबर और ज्यादा पेश होंगी और तब से वर्तमान तक हजारों बेगुनाहों की जानों का ठीकरा बुश के सर फूटेगा, मैं तो इसे दुनिया की सबसे बड़ी आतंकी हमला कहूँगा, जो अमेरिका ने इराक पर किया| बुश क्या इससे पहले भी जैसा कि सबको पता है वियतनाम पर रिचर्ड निक्सन की बमबारी के वर्षों बाद उजागर हुई थी | आज सद्दाम हुसैन को राष्ट्रवादी शहीद का दर्जा और खिताब मिल चुका है | उनकी हत्या का प्रतिरोध और प्रतिकार इराक में रोज़ हो रहा है, अमेरिकी सैनिकों (आतंकी घुसपैठिये) और उनके अरब दलाल की बम विस्फोटों में मौतें इसके सबूत हैं| मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ क्या इराक पर अमेरिकी आतंकी हमले से पूर्व वहां इतनी ही अशांति थी, अवश्य आपका जवाब नहीं होगा और आप यह ज़रूर कहेंगे कि पहले वह बहुत खुशनुमा माहौल था | 
उन्नीस साल पहले सीनियर जार्ज बुश ने सद्दाम हुसैन पर पहले बमबारी की थी| प्रतिकार में सदाम हुसैन ने पुत्र और इराकी पत्रकार उनियां के प्रेसिडेंट उदय हुसैन ने इराक के होटलों के प्रवेश द्वार पर बिछे पायदान में बुश की आकृति बुनवा कर लगा दी | महाबली के अपमान का यह नायाब तरीका था | पितृऋण चुकाने का इसके बाद जूनियर बुश ने बिल क्लिंटन के बाद राष्ट्रपति निर्वाचित होते ही बदला लेने के लिए मौके तलाशे और इराक पर बमबारी कर दी | बहाना था इराक में नरसंहार के आयुधों का उत्पादन जो आजतक साबित नहीं हो सका |

सदाम हुसैन का अवसान भारत के लिए राष्ट्रिय त्रासदी थी क्यूंकि वह इस्लामी राष्ट्रनायकों में एक वाहिद सेकुलर व्यक्ति था | केवल चरमपंथी लोग ही उसकी मौत की पीड़ा से अछूते रहे | कारण ? दर्द की अनुभूति के लिए मर्म होना चाहिए | इराकी समाजवादी गणराज्य के दिवंगत राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन अल तिकरिती पर चले अभियोग और फिर सुनाये गए फैसले को महज राजनैतिक प्रहसन कहा जायेगा| 

भारत के हिन्दू राष्ट्रवादियों को याद दिलाना चाहता हूँ कि सदाम हुसैन अकेले मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष थे जिन्होंने कश्मीर को भारत का अविभाज्य अंग माना और ऐलानिया कहा भी | अयोध्या कांड पर बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी तो इस्लामी दुनिया में बवंडर मचा था तो उस वक़्त बगदाद शांत था| बकौल सद्दाम हुसैन "वह एक पुराणी ईमारत गिरी है, यह भारत का अपना मामला है| उन्हीं दिनों ढाका में प्राचीन ढाकेश्वरी मंदिर ढहाया गया| तसलीमा नसरीन ने अपनी कृति (लज्जा) में हिन्दू तरुणियों पर हुए वीभत्स ज़ुल्मों का वर्णन किया| इसी पूर्वी पकिस्तान को भारतीय सेना द्वारा मुक्त करने पर शेख मुजीब के बांग्लादेश को मान्यता देने में सद्दाम सर्वप्रथम थे|

इंदिरा गाँधी की (1975) इराक यात्रा पर मेजबान सद्दाम हुसैन ने उनका सूटकेस उठाया था | जब राएबरेली लोकसभा चुनाव में वे हार गयीं तो इंदिरा गाँधी को बगदाद में स्थाई आवास की पेशकश सद्दाम ने की थी | पोखरण द्वितीय पर अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार को सद्दाम ने बधाई दी थी, जबकि कई राष्ट्रों ने आर्थिक प्रतिबन्ध लादे थे| सद्दाम के नेतृत्व वाली बाथ सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के राष्ट्री अधिवेशनों में शिरकत करते रहे| भारत के राजनेताओं को ज़रूर याद होगा कि भारतीय रेल के लाखों कर्मचारियों को आकर्षक अवसर सद्दाम ने वर्षों तक उपलब्ध कराए| 

उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम में तो इराक से मिले ठेकों से खूब पैसा कमाया| 35 लाख भारतीय श्रमजीवी सालाना एक ख़राब रुपये भारत भेजते थे | भारत को इराकी तेल सस्ते दामों पर उपलब्ध होता था | इस सुविधा का भी खूब दुरूपयोग तत्कालीन रूलिंग पार्टी के नेताओं ने किया था| इराक के तेल पर कई भारतीयों ने बेशर्मी से चाँदी काटी| 

एक दैनिक हिंदी अखबार में एक संपादक श्री के. विक्रम राव ने अपनी इराक यात्रा की वर्णन में यह कहा था कि उसे इराक में के शहरों में तो बुरका नज़र ही नहीं आया था | उन शहरों में कर्बला, मौसुल, तिकरिती आदि सुदूर इलाके थे| स्कर्ट और ब्लाउज राजधानी बगदाद में आम लिबास था, माथे पर वे बिंदिया लगतीं थी और उसे हिंदिया कहती थीं| लेकिन पूरी तरह से पश्चिम का गुलाम हो चुका हमारा मिडिया तो वहां की ऐसी तस्वीर दिखाता कि पूछो मत |

अब की तस्वीर पर अज़र डालेंगे तो मिलेगा की सद्दाम के समय में हुई तरक्की में अब गिरावट आ गयी है बल्कि वह पतन पर है| टिगरिस नदी के तट पर या बगदाद की शादकों पर राहजनी अब आम बात हो गयी है | एक दीनार जो साथ रुपये के विनिमय दर पर था आज रुपये में बीस मिल जायेंगे और अब तो विदेशी विनिमय के दफ्तर यह कहते हैं कि आर बी आई के अनुसार इराकी मुद्रा विनिमय योग्य नहीं है | दुपहियों और तिपहियों को पेट्रोल मुफ्त मिलता था, शर्त यह थी कि ड्राईवर या गाड़ी मालिक उसे स्वयं भरे | और भारत में बोतल भर एक लीटर पानी दस रुपये का है| सद्दाम के इराक में उसके छते अंश पर लीटर भर पेट्रोल मिलता था | अमेरिका द्वारा थोपे गए कथित लोकतान्त्रिक संविधान के तहत इराक के सेकुलर निजाम की जगह अब अमेरिका के दलालों ने ले ली है, जिनमे कठमुल्ले भी हैं| 

लेकिन भाजपाई जो मोहमद अली जिन्ना को सेकुलर के खिताब से नवाजते हैं, सद्दाम हुसैन को सेकुलर नहीं मानेंगे | उसका कारण भी है सद्दाम हुसैन पांचों वक़्त की नमाज़ पढ़ते थे, वहां नमाज़ के वक़्त दुकाने और प्रतिष्ठान बंद हो जाते थे | सद्दाम हुसैन अपने साथ हर वक़्त कुरान की एक प्रति अपने साथ रखते थे| पैगम्बर मोहम्मद (इश्वर की उन पर शांति हो) के साथ साथ ईसा मसीह को भी इसलाम के पैगम्बर में से एक मानते थे| इसका उन्होंने खामियाजा भुगता | अमेरिकी पूंजीवादी दबाव में साउदी अरब के शाह नेशलिस्ट इराक को नेस्तनबुत करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी | साउदी अरब में प्यारे नबी मोहम्मद (ईश्वर की उन पर शांति हो) के जन्मस्थली के निकट अमेरिकी सेना (हमलावर, आतंकवादी) को जगह दी और जन्मस्थली के ऊपर से जहाज़ उड़ कर प्यारे नबी के नवासे के कुरबानगाह पर बम बरसाए |

सद्दाम के डर के मारे अरबी शासकों के लिए यह भी था कि इराकी सेना ने कुवैत पर कब्जा किया है (कुवैत इराक का अभिन्न अंग था) और वह मज़हबी सुधार लाया था | पिछली सदी के चौथे दशक तक कुवैत इराक का अभिन्न अंग था| सद्दाम को दण्डित करने के कारणों की यूरोप अमेरिकी राष्ट्रों ने लम्बी लिस्ट बनाई मगर मुकदमा चलाया पच्चीस साल पुराना घटना के आधार पर | अपराध मडा दुजाईल प्रान्त में 148 शिया विद्रोहियों की (1982 में) हत्या करवाने का |  

मगर इतिहास करवट लेता है | सद्दाम हुसैन भी अब इमरे नाष की भांति इराकी देशभक्त और इस्लामी राष्ट्रवाद के प्रतिक बन रहे हैं, जैसे मिस्र के जमाल अब्दुल और तुर्क के मुस्तफा कमाल पाशा अतातुर्क हैं|

Saturday, April 11, 2009

कैटवॉक करती भारत की जनता

कुछ दिनों से देख रहा हु राजनीति में नए नए प्रयोगों किये जा रहे है सभी का रंग ढंग बदला है कारण एक मात्र सत्ता की चाहत , सभी चाहते है सत्ता सुंदरी का रसपान करना यहाँ मै एक बात जरुर कहना चाहुगा जो मेरी नहीं बल्कि " मोहल्ले " से ली गई है उन्होंने बहुत अच्छी बात लिखी थी "सम्मान भीख में नहीं मिलता और इज्जत बेचारों की बीवी का नाम नहीं हो सकता। पत्रकारों को पहले खुद अपने सम्मान के लिए आवाज उठानी होगी। उन्हें खुद कहना होगा कि हम न तो रैंप पर चलेंगे, न विज्ञापन के लिए कलम बेचेंगे। अगर दम है तो बात करो, दम से बात करो। वरना जोकर लगोगे और जमाना ऐसे ही रैंप पर घुमाएगा।" इन वाक्यो में बहुत दम है पर इसे वृहत रूप में देखे तो ये देश पर भी लागु होती है चंद लोगो को रैंप पर कैटवॉक क्या कराया सारे बरस पड़े उन पर , इसमें बुधजिवी से लेकर बाकि भी शामिल थे..... पर उनका क्या जो ६० साल से हमें और सारे देश को कैटवॉक कराते चले आरहे है हा मै राजनीति की ही बात कर रहा हुं पुरे ६० साल से भी ज्यादा हो गए जनता और देश को कैटवॉक कराते कभी कपडे के तो कभी बिना कपडे के तब हम क्यों कुछ नहीं कर पाए मुझे याद है एक बात और किसी ने लिखा था गर्व से कहो हम चूतिये ये भी सच है  









अब अभी नहीं समझे चलिए और बताता हु






इन सभी महानुभाओ को तो आप पहचानते ही होगे जी हां ये वहीहै भारत के भाग्यविधता माफ़ कीजिये भावी भारत के भाग्य विधता जिन्होंने हर ५ साल में वही बाते करने , दुहराने , सपने दिखाने का बीडा उठाया है और हासील सिफर , इस बार फिर वैसा ही या उससे कुछ ज्यादा हो तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी अब हम २१ वि सदी में जो है सवाभाविक है सब कुछ बदलेगा तो भारतीय राजनीति क्यों नहीं इन सब के बावजूद सब खुद को बुद्धिमान और और दुसरे को ....... साबित करने में लगे है राजनितिक गठजोड़ और सत्ता सरकार के लिए लुका छिपी का खेल किसी से छुपा नहीं जग जाहिर है इतने पर भी हिंदुस्तान की जनता का मन नहीं भरा और वो फिर से एक संसद कांड और न जाने कितने गठजोड़ घोटालो को आमंत्रित करने फिर से वोट डालने वाले है ये मै इस लिए कह रहा हु क्यों की आज तक तो सब ऐसे ही चलता आया है तो अब क्यों नहीं और क्या बदलेगा मै किसी पार्टी राजनीति का पक्षधर नही हु मै जो कह रहा हु वो तथ्यों के आधार पर ही ना कि वास्तविकता से परे साहित्यकार की तरह महज कल्पना मात्र. जो वर्तमान और उनकी परेशनियों को भूल कल्पनाओ में जीता है

चलिए इनसे पूछते है इन्हें छठ्वां वेतन मान मिला की नहीं ? सामान्य केंद्रिय कर्मचारी ६०००० और ४०००० वेतन पा रहा है इसके पास क्या है ?








ये है ६० साल में हमारा राजनीत परिपेक्ष. युवा की बात करे तो उनकी अपनी परिभाषा है उन्हें देश से कोई मतलब नहीं उन्हें मतलब है युवा नेता से जिसके भाषण की शुरुवात केंद्र ने पैसे भेजा और उसका उपयोग नहीं किया यही है ५ मिनिट का भाषण इसके आगे सब ख़त्म उसके बाद प्रश्न उत्तर काल शुरू हो जाता है हमारे युवा शायद दुसरे मनमोहन सिंग की फिराक में है या यु कहे इन्हें वर्तमान प्रधानमंत्री बहुत पसंद है वैसे इसमें इन युवाओ का भी दोष नहीं क्यों की वे अभी तक हायर एजुकेशन , बड़ी नौकरी [वो भी विदेश में ] ,सुन्दर लड़की और पब संस्क्रति से ही नहीं उबर पाए है।

मुझे याद है वर्ष २००० में मेरा सामना गैस कनेक्शन के सिलसिले में दुकान दार से हुआ जिसने मुझे सलाह दी की आप गैस कनेक्शन ट्रांसफर करा के क्या करेगे आप अभी नया ले लीजिये जिस गैस कनेक्शन को मैंने सांसद और विधायक कोटे से प्राप्त किया था वो ऐसे ही चला गया . अब क्या करता ये थे भाजपा के ५ साल के कारनामे ६० ६५ साल में आज तक कभी गैस कनेक्शन और गैस इतने सुलभ कभी नहीं देखे जितने वर्ष २००० में थे ।

ठीक वैस ही व्यवसाय का रूप ले चुकी राजनीति को वश में करने के लिए २००० में ही विधेयक पास हुआ दलबदल कानून और मंत्रीमंडल विस्तार कानून जी हा ९० मंत्री थे साहब युपी में , किसी कवि ने इसका अच्छा उदाहरण देते हुए कहा था कि युपी में थूकना भी है तो देखा कर थूकना पड़ता है की कही मंत्री जी पर ना गिर जाये इसके लिए भी हमें ५० साल लग गए .

गाव में सड़क तो दूर दूर तक दिखाई नहीं देती थी जिसके लिए हर ५ साल में कांग्रेसी वादा करते आये और ५० साल गुजर दिए वह भी इसी कार्यकाल में पूरा हुआ

एक महत्वकान्क्षी योजना और थी भारत के पास जमीन तो बहुत है पर पानी नहीं उसके लिए नदियों को जोड़ने की योजना प्रारम्भ की थी पर वर्तमान सरकार के आते ही सब बंद इन्हें अपने ही फार्म हॉउस में पानी पहुचने से फुर्सत मिले तो ये आपके लिए सोचे अभी तक ६ पंचवर्षीय योजनाये इस देश में पूरी हो चुकी है और सातवी आने वाली है शायद अब बताइए की आप और देश का कितना विकास हुआ है ये सब मै राजनीति से प्रेरित हो कर नहीं बल्कि भारतीयता से प्रेरित हो कर कह रहा हु

भारतीयों पर पोटा और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही और आतंकवादी को रिहा ये है मेरे भारत की महानता अब्ब्जल और कसाब इसका प्र्त्यक्ष उदाहर्ण है ६० साल फिर भी कोई लेखा जोखा नहीं चारो ओर से घुसपैठ और आतंकी गतिविधिया जोरो पर है पर हमारे नेता तो राजनीति में मशगुल है कोई ठोस कार्यवाही नहीं बस कर्ज लो और स्विस बैक में बैलेन्स बढ्वो अगर आप पुरे देश में आंतकवादी गतिविधियों में बंद किये गए कैदियो की सख्या और उन पर होने वाले खर्च का आकडा देखे तो चौकनेवाले तथ्य सामने आयेगे बावजूद इसके मेरा भारत महान और मेरे देश वासी ऊससे ज्यादा महान, महानता में तो हमने बहुत रिकार्ड बनाये है क्या २०० साल की गुलामी ने हमारे ऊपर इतना गहरा असर किया है की आज हम फिर से गुलामी में जीना चाहते है पहले अंग्रेजो की और इन ५० साल वाली सरकार की क्या हो गया है इसलिए दोस्त इसे दोबारा पढो

"सम्मान भीख में नहीं मिलता और इज्जत बेचारों की बीवी का नाम नहीं हो सकता। भारतीयों को पहले खुद अपने सम्मान के लिए आवाज उठानी होगी। उन्हें खुद कहना होगा कि हम न तो शोषित होगे , ना कपडे उतारेगे । अगर दम है तो बात करो, दम से बात करो। वरना जोकर लगोगे और नेता ऐसे ही रैंप पर घुमाते रहेगे ।"


एक भारतीय के आवाज

आगे पढे .....










सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

पार्टियों के विजापन के आधार पर सरकार


राजनैतिक महाकुम्भ २० - २० की उलटी गिनती शुरू हो गई है और हर राजनैतिक दल सारी ताकत लगा कर अपने अपने चुनाव प्रचार में लग गया लेकिन इन सबके बीच एक और समुदाय है जिन्होंने चुनाव का बीडा उठा रखा है वो है मीडिया जी हा ये वही मीडिया है जिन्होंने साल भर पहले महगाई , परमाणु करार के मुद्दे पर तत्कालीन सरकारकी बखिया उखेड़ने में कोई कसर नहीं छोडी थी लेकिन आज स्थिति अलग है ..... हर चैनेल सर्वे के आधार पर सरकार बना और गिरा रहा है पर इसमें भी राजनीति है आप ध्यान से देखेगे तो पायेगे की बहुत से चैनेलोमे में राजनैतिक पार्टियों के विजापन भी चल रहे है लेकिन उसमे गौर करने वाली बात यह है कि जिसके विजापन के बाद उसकी कि सरकार चैनल में बनती दिखाई देती है मतलब जैसे की कांग्रेस का विजापन तो सरकार और बढ़त कांग्रेस की बता दी जाती है वैसे ही भाजपा के विजापन के बाद दिखाए जाने वाले सर्वेक्षण में भाजाप् को आगे दिखा दिया जाता है महज ये इतिफाक नहीं बल्कि कई बार ऐसा देखने मिल रहा है तो ये कैसा सर्वे आप ही बताइए .लगता है अब सर्वे पार्टियों के विजापन के आधार पर भी किये जा रहे है

मेरी परेशनी ये है यार मेरे ब्लाग में और अलग से ब्लाग बनते जा रहे है


मेरी परेशनी ये है यार मेरे ब्लाग में ओर्र अलग से ब्लाग बनते जा रहे है

Friday, April 10, 2009

जिंदल पर चला जूता


नेताओं पर जूता फेंकने की घटना में इजाफा होता जा रहा है पत्रकार जरनैल सिंह  द्वारा  गृहमंत्री पी चिदंबरम  पर जूता  फेकने के बाद अब कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल को भी एक फ्लाईंग जूते का सामना करना पडा.आज कुरुक्षेत्र में एक चुनावी रैली के दौरान एक रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल ने नवीन जिंदल को निशाना लगाकर जूता फेंका।
  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक  कांग्रेसी नेताओं, उनके वादों और कांग्रेस की नीतियों से नाराज होकर  रिटायर्ड प्रिंसिपल राजपाल ने  नाराजगी जताते हुए कुरुक्षेत्र से कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल पर भरी चुनावी सभा के दौरान उनपर जूता फेंका, लेकिन निशाना चूक गया और जूता नवीन जिंदल को नहीं लगा.हालांकि कांग्रेस का दावा है कि वह शराब के नशे में थे और इस घटना के पीछे विरोधियों का हाथ है। फिलहाल राजपाल को पुलिस ने हिरासत में  लिया ओए पुछ्ताछ के बाद छोड़ दिया 
 

Tuesday, April 7, 2009

गृहमंत्री चिदंबरम पर पत्रकार ने जूता फेंका


गृहमंत्री चिदंबरम पर पत्रकार ने जूता फेंका
इराक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बूश पर जूता फेंकने की घटना भारत में भी तरोताजा हो गई आज नई दिल्ली में मंगलवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिन्दी अखबार दैनिक जागरण के पत्रकार जरनैल सिंह ने भावना में बहकर उन पर जूता फेंका।

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