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Tuesday, September 7, 2010

अपने सम्मान के चक्कर में फेक दिया बच्चो के स्वाभिमान पर कचरा .....


अपने सम्मान के चक्कर में , फेका बच्चो के स्वाभिमान पर कचरा इस तस्वीर को जरा गोर से देखिये नहीं समझ आये तो एक बार और देखिये, अब आप समझ ही गए होगे की मै आपको क्या दिखाना चाहता हू, हा बिलकुल सही वैसे तो मेरे पास इनके लिए शब्द नहीं है फिर भी कह देता हु इन मूर्खो को ये भी नहीं पता की तस्वीर कैसे खिचाई जाती है , और बेशर्मी का आलम तो देखिये जब सारे बच्चो के हाथ में पोधे है जो शायद ऊसके बोझ को भी मह्सूस कर रहे है ऐसे में ये महानुभाव की कुटिल मुस्कान और भाव भंगिमा तो देखिये कितनी सहजता से मुस्कारते हुए तस्वीर खीचा रहे है इसमें इनका पूरा साथ टीचरों ने भी दिया . शायद ये भूल गए की साथ में जो मोजूद है उनका मकसदकुछ और है पर इनका मकसद सिर्फ तस्वीर खीचना इन जैसो के लिए मेरे पास एक ही वाक्य है अपने सम्मान के चक्कर में फेक दिया बच्चो के स्वाभिमान पर कचरा .....

Tuesday, June 1, 2010

Wednesday, April 7, 2010

रोने का बहाना नहीं ,लड़ने का हौसाला चाहिए

देश - प्रदेश में जब भी कोई बड़ी वारदात के मद्देनजर जन हानि होती है तब-तब बहुत से संगठन महाबंद और मोमबत्ती जलने से परहेज नहीं करते . आज कल ये फैशन सा बनता जा रहा है
जिसे देखो गाँधी की तर्ज में गाँधी बनाने की चाह लिए इस तरह के कार्यो का आयोजन करते दिखाई पड़ते है . सवाल आखिर यह है की क्या मोमबत्ती जलने और महाबंद जैसे आयोजनों से समस्या का समाधान हो जायेगा या फिर जनहानि को रोका जासकेगा दुसरे शब्दों में हम यह कहे की क्या इस कार्यो से धटित जनहानि की पूर्ति की जा सकेगी ...? शायद नहीं . अच्छा तो यह होता इसके बजाये यह संगठन हमसे दूर हुए जवानो के परिवार में से किसी एक परिवार के लिए कुछ करते. .यह संगठन इतने ही चिंतीत है तो अपनी एक दिन की तनख्वाह या अपना एक दिन में खर्च की गई राशी इन्हें भेट कर देते तब लगता की हा ये जमीनी रूप से इन सब के लिए चिंतित है बहरहाल लड़ने का हौसाला खो चुके इन संगठनों के लिए हम यही कहेगे, इन सभी को रोने का बहाना चाहिए ...

लहूलुहान धरती को तलाश है अरूंधति के आंसू की ..



कुछ दिन पहले आप यहाँ आयी थी जंहा आज हिंसा की पराकाष्ठ देखने को मिली है गरीबो की बात करना और एक
बेहतर संसार के निर्माण में आप की लेखनी कुछ ज्यादा ही बोलती है और लेखन के आलावा कला फिल्म में भी यही कुछ होता है गरीबो की बात सारा कुछ सही है.मैडम आप रूमानियत में बहती है आसू तो तब भी निकले होगे जब आपके पहले पति ने आपको तलाक दिया होगा , नहीं निकले होगे तो कुछ और बात है इस घटना को लेकर जो की निहायत ही व्यक्तिगत किस्म का है उसे लेकर हम आप पर कोई उपमा टिपण्णी नहीं लादेगे . बस्तर को लेकर आपने जो कहा लिखा और उसके बाद जो कुछ हुआ क्या उसको लिखने का आपका मन नहीं करता, यदि नहीं करता तो हम यही कहेगे लिखने पढने वाली यह मैडम कितनी संग दिल है दिल्ली में रहकर जंतर मंतर के आसा आस-पास जो कुछ करती है ऊससे कही ज्यादा प्रभावशाली होता आज के दिन आपकी आँखों से टपका हुआ दो बूंद आंसू .... . समर शेष है वही तटस्थ होगा , इतिहास में उसका भी अपराध दर्ज होगा ....

संपादक
रविकांत
CG4भड़ास.कॉम

Wednesday, March 31, 2010

सम्पादकीय हमरछत्तीसगढ .कॉम समाचार पत्रिका

मार्च - अप्रेल संयुक्तांक

हमर सम्पादकीय

Saturday, February 20, 2010

हमर छत्तीसगढ कॉम मासिक पत्रिका का फरवरी अंक


हमर छत्तीसगढ कॉम मासिक पत्रिका का फरवरी अंक

Saturday, January 30, 2010

हमर छत्तीसगढ.कॉम मासिक पत्रिका का प्रवेशांक


छत्तीसगढ से प्रकाशित एक मात्र बहुरंगीय मासिक पत्रिका , हमर छत्तीसगढ.कॉम मासिक पत्रिका प्रवेशांक उपलब्ध है .

Thursday, December 31, 2009

नव वर्ष की शुभकामनाये


नया साल आपके जीवन को सुख, सौभाग्य और सफलता के साथ-साथ 'सार्थकता' से सराबोर करे, बस इतना सा ख्वाब नए साल पर ......
CG4भड़ास.कॉम
हमर छत्तीसगढ.कॉम

Wednesday, November 11, 2009

मी मराठी , मैं हिन्दी , और दुनिया गयी भाड में


हिन्दी है हम 
वतन हैं हिंदुस्तान हमारा


ये बात अब पुरानी हुई लगती है .खासकर आज महाराष्ट्र विधानसभा में जो भी हुआ है उसके बाद लगता है कि अब ना तो हिन्दी राष्ट्र भाषा रह गयी है और ना ही हिंदुस्तान हिंदुस्तान .अब तो ये महाराष्ट्र ,आसाम,कश्मीर,नागालैंड ,तमिलनाडु जैसे छोटे छोटे राज्य  देश बनते नज़र आ रहे हैं .हम पाकिस्तान और चीन का बहुत हो हल्ला करते रहते हैं लेकिन लगता है कि नक्सली,माओवादी ,उल्फा और ना जाने कितने ही ऐसे संघठन और दल हैं जो हमारे देश से अपने आपको अलग करना चाहते हैं .पहले तो दक्षिण में हिन्दी के विरोध में आन्दोलन चलते थे पर वो शायद ऐसे ना रहे होंगे या मैं कहूँ की वो समय अलग था .आज महाराष्ट्र पर राज करने का सपना लेने वाला राज इतना आगे बढ़ चुका है की ना केवल उतर भारतीयों को पीटा था है बल्कि अब एक विधायक द्वारा हिन्दी में शपथ लेने पर उसके साथ विधानसभा में ही हातापाई  कर दी गयी .
                    6 दशक बाद भी हम आजाद नहीं है .ना समाज से ,ना इन नेताओं से ,ना अपने आप से.बस एक बार किसी के इलाके ,धर्म ,भाषा का नाम ले दिया जाये तो हंगामा हो जाता है .ये सब याद दिलाता है भीष्म साहनी की अमर कृति तमस के उस भाग को जहाँ एक सुवर को मारा जाता है और बाद में अँगरेज़ उस के द्वारा हिन्दू मुस्लिम में दंगे करवा जाते हैं .इस से तो ऐसा लगता है की कहीं ना कहीं आज के नेता अंग्रेजों से कहीं घातक हैं .जो अपने आप को संविधान से ज्यादा मानते हैं .
                    वैसे मुझे लगता है की कहीं ना कहीं जो मुद्दा राज ठाकरे उठा रहे हैं ,या कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बोला वो कहीं ना कहीं सही भी है ,बस बात ये है की उस बात को किस तरीके से दुनिया के सामने रखा जाये.आज तक जो भी  विस्थापन  पूर्व से हुआ है उसमें पुरानी सरकारों का बहुत बड़ा हाथ है .अगर सरकारें सही तरीके से काम करती तो क्या यु.पी.-बिहार में दुसरे इलाकों जितने साधन नहीं है की वो  विकसित  राज्य ना बन सकें .हमारे देश की राजनीती का सबसे अहम् हिस्सा  होते हुए भी वो सबसे बुरी हालत में हैं .इस के चलते पूर्वी यु.पी.-बिहार से नबे के दशक से दुसरे राज्यों में  विस्थापन  शुरू हुआ ,वो कहीं ना कहीं देखा जाये तो उन इलाकों  के लिए एक तरह से विष  बन चुका है .कोई माने ना माने पर हम लोग कुछ हद तक इन बातों को मानते हैं की पूर्व से आये लोगों ने यहाँ के हालत  बहुत बदल दिए  है .और ये  अच्छे हालत  तो बिलकुल भी नहीं है . और वहां से  विस्थापन  का दोष हम उन लोगों पर नहीं लगा सकते .ये इस विशाल देश की एक और दशा है .
                   राज ठाकरे ये भूल जाता है मराठी लोग भी देश के दुसरे हिस्सों में रहते हैं ,फिर तो उन्हें उन मराठी लोगों को अपने राज्य में बुला लेना चाहिए  , ताकि  वो अपनी जन्म भूमि की गोद में मर सकें .आज राज्यों के साथ ऐसा है ,कल फिर एक राज्य के विभिन् इलाकों के लोग कहेंगे की हमारे इलाकों में मत आओ .महाराष्ट्र  में ही कोंकण है जहाँ की भाषा कोंकणी है फिर तो वो लोग मुंबई नहीं जा पाएंगे .कुछ दिनों बाद हालत ये होंगे की भईया अपने जिले में रहो नहीं तो अच्छा  नहीं होगा .वैसे 2012 तो नजदीक ही है .लेकिन  एक बात ये है की अगर ऐसे लोग और 2-4 हो गये तो 2012 की भी जरुरत नहीं है .
sumit
(www.radiojosh.blogspot.com)

Friday, November 6, 2009

रोड शो की सफलता के बाद अब एअर शो


राज्य सरकार उनके मंत्री और मातहतों के जमीन और कागजो पर कमकरतब थे जो अब राज्य सरकार
रोड शो की सफलता के बाद अब एअर शो आसमान पर करतब दिखने का आयोजन कररही है सरकार की ख्वाइशे हनुमान की पूछ से कम नहीं, कभी भी लम्बी हो निकलती हैदरसल राज्य उत्सव के चलते राजधानी में
...आज एअरशो आयोजन है हजारो बच्चो और सरकारी अमला कही व्यवस्था तो कही भीड़ के रूप में शामिल कर उत्सव में चार चाँद और उसे सफल बनाने की कवाद की जायेगी. राज्य के स्कूली बच्चो समेत सभी को कम उचाई से विमानों के करतब दिखने का प्रबंध किया गया है. दो बार स्थल परिवर्तन के साथ आज ये शो बुढा तालाब के ऊपर प्रदर्शित होगा वैसे आज ए़क शो और भी है , चुनावी - शो यह करतब वैशाली नगर की जनता चुनावी समर में शामिल प्रत्याशी और सरकार को दिखाएगी .फिर चाहे विजय प्रत्याशी जनता को ५ साल अपना करतब दिखाए ये और बात है
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Saturday, October 31, 2009

जनता के पैसे पर नेतावो का उत्सव

हैप्पी बर्थ डे "छत्तीसगढ", आज "हमर छत्तीसगढ" ९ साल पूरा कर 10 वे साल में कदम रखेगा. फिर एक बार राजन का परचम लहराएगा, फिर ए़क बार बखानो का पुलिंदा पकडा दिया जायेगा, फिर ए़क बार राज्य के घरो में अँधेरा कर कोठियों को प्रजव्लित किया जायेगा, फिर ए़क बार बाहर से आये महानुभाओं का हम सत्कार करेगे और उपकार सुनेगे, फिर एक बार खेल के मैदानों को गढढो में तबदील कर छोड़ दिया जायेगा, फिर ए़क बार 2.5 करोड़ जनता इसकी तमाश बीन बनेगी. इस तरह आज से छतीसगढ में स्थापना दिवस का ऊलास परवान चढेगा, सात दिन का उत्सव सात करोड़ खर्च और सात महीने से सरकारी कर्मचारी का काम बंद, यही दांस्ता है छग राज्योत्सव की...........
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Tuesday, October 20, 2009

खुद को कंगाल कर के आप बना रहे है सबको करोड़ पति




अभी तक आपने कौन बनेगा करोड़ा पति , फिर दस का दम , और अब सच का सामना जैसे बहुत से धनवान बनाने वाले कार्यक्रम देखे होगे. और सब की धुरी भी अर्थ ही है मतलब पैसा, जी हां हम सभी के मन में ये चाह अंकुरित होते रहती है .. की हम भी करोड़ पति बन जाये ..अब सुनिए एक और सच की आप और हम सभी बना रहे है करोड़ पति ..., करोड़ पति नहीं बल्कि दुनिया का सबसे धनि व्यक्ति जी हा हम ही बनाने जा रहे है दुनिया का सबसे धनि व्यक्ति. वर्ष २०१० में दुनिया का सबसे धनि कौन होगा आपके मन में यह सवाल आ ही गया होगा तो सुन लीजिये ऑरकुट का जनक उनका नाम है आरकुट ब्युक्कोटन वही उसके पिता है जो बनने जा रहे है दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति वो भी अपनी कम मेहनत और आपके ज्यादा सहयोग से. चौकिये मत आपके बूते और भी बहुत लोग चांदी काट रहे है और आप इंटरनेट का बिल भुगतान कर रहे है. ये लिखते समय ही एक इंटरनेट मित्र से मेरी बात हुई जिसमे उन्होंने बहुत ही विनम्रता से ये बात कही " मेरे पास ब्राड बैंड पल्स का प्लान है जिसमे १ जीबी स्पेस ही फ्री है सो रात में देखुगा. मतलब हम किस तरह अपनी सामर्थ से खुद की चादर के अपुरूप इंटरनेट का उपयोग कर के भी किसी को धनि बना रहे है. जितने लेख और आलेख इन ब्लाग और इंटरनेट के साधनों में उपलब्ध है उसे वैलुबली मापे तो लाखो रु के होगे क्यों की एक आलेख १००० रु के भी जोड़े जो मैगजीन या अख़बार से मिलता है तो भी इनकी कीमत का अंदाजा आप खुद लगा सकते है की ये कितने के है. ये तो हुई आलेख या ब्लाग में रखे मटेरियल की बात अब अगर हम उसके संचालक और संचालन पर नजर डाले तो पायेगे की जितना आप महीने के इंटनेट का बिल भरते है उससे कही ज्यादा आपके सर्फिंग या मात्र रजिस्ट्रेशन से उन्हें मिल जाता है वो भी एक दिन में जरा इन आकडो पर गौर करे ...
गूगल आरकुट ब्युक्कोटन को,प्रत्येक व्यक्ति रजिस्ट्रेशन के १२ डाँलर भुगतान करता है वही किसी व्यक्ति को मित्र बनाने पर १० डाँलर ८ डाँलर का भुगतान किया जाता है जबकि कोई मित्र के जरिये मित्र बनता है तो ५ डाँलर जब आप किसी को स्क्रेप भेजते है या कोई आपको स्क्रेप भेजता है तो ४ डाँलर प्रति व्यक्ति के हिसाब से गूगल ऑरकुट को भुगतान करता है बात यही ख़त्म नहीं होती २०० डाँलर प्रति फोटो डाऊनलोड के ,१.५ डाँलर जब कोई किसी को फैन बनता है , हांट लिस्ट में स्थान देने पर २.५ डाँलर. इसी तरह लांग आउट करने के १ डालर और स्क्रेप पढने और सूचि देखने के लिए ०.५ डाँलर अब आप सोचिये . ठीक इसी तरह फेस बुक से लेकर हर वो साधन जो इंटरनेट में चलाये जा रहे है फिर वो याहू हो गूगल या hi5 या फिर कोई अन्य सभी में कमाई की जा रही है और माध्यम आप है. आप फिर चाहे ब्लाग उपयोग करते है या फिर कोई भी इंटरनेटीय संसाधन सभी में आपकी ही मेहनत से करोड़ पति बनाने की कवायद में लोग जुटे है . जहा तक मुझे याद है आरकुट में मित्र बनाने - बनने के आलावा ऐसा कुछ और नहीं है जिससे उपयोग कर्ता को फायदा पहुचे और मित्र भी ऐसे जिनके नाम ही गलत होते है जैसे लड़की का नाम और बनाने वाल लड़का . अब आप ही बताइए ऐसे मित्र बना के किसे फायद पहुचेगा। तो आप बना रहे है ना दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति वो भी खुद को कंगाल कर के ......आये दिन ऐसे नए प्रयोगों से मेल लदे पड़े रहते है जिन्हें इजात कर इंडिया में छोड़ दिया जाता है टेस्टिंग के लिए

Saturday, October 17, 2009

घी के दीये जलावो, जहरीली मिठाई खावो

बहुत पहले की एक धार्मिक कहानी याद आती है की शिर्डी के साई बाबा ने अपनी अलौकिक शक्ति के माध्यम से पानी के दीये जलाये थे....,जगमगा उठी थी शिर्डी ... निश्चित ही बाबा का यह चमत्कार उस वक्त हुआ था जब लोग निराश थे ना धी था और ना इतने पैसे, तब लोगो की खुशियों को बरक़रार रखने के लिए बाबा ने यह चमत्कार किया था ताकि दीवाली के दिन लोग उमंग से भरे रहे बाबा का यह काम चमत्कारी नहीं कल्याणकारी था
आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये सहि
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Wednesday, October 14, 2009

धनतेरस - धनवंतरी, रमन का जन्म दिवस - मणिकांचन संयोग


धनतेरस धनवन्तरि जयंती और जन्म दिन सौभाग्यवश ये तीनो एक ही दिन पड़े है धनतेरस की मान्यता पर जाये तो दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला ये त्यौहार धनवन्तरि से जुडा है जिस प्रकार देवी लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थी उसी प्रकार भगवान धनवन्तरि भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं.
देवी लक्ष्मी धन की देवी हैं परन्तु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए आपको स्वस्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए यही कारण है दीपावली से दो दिन पहले ही, यानी धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हें.त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है. लेकिन आज का दिन एक और मायने से खास है जी हा आज छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री का जन्म दिन है वे आज अपना ५७ वा जन्म दिन मनायेगे

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Monday, October 12, 2009

किसको करूँ वोट


हरियाणा  में कल  चुनाव हैं ,और मुझे  समझ नहीं आ रहा की मैं वोट देने जाऊँ या नहीं . अब इस मसले में २ बातें हैं .पहली तो ये की कुछ महीने  पहले  ही  मैं  रेडियो में  वोट देने के लिए लोगों का ईमान जगा रहा था ,और दूसरा ये की मेरे चुनाव-क्षेत्र में मुझे कोई ऐसा उमीदवार नहीं दिखता की मैं उसे वोट दूँ .दूसरी बात के लिए मैं कहना चाहूँगा की उमीदवार जरुर है पर जिस  पार्टी की वो उमीदवार हैं वो पार्टी प्रदेश में अंग्रेजी गाने नहीं बजेनी देगी अगर वो सता में आती है तो .
वैसे जिस पार्टी की मैं बात कर रहा हूँ उसका हरियाणा की सत्ता में आना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है .फिर भी इस पुरे वाकया ने मेरे साथ अछी खासी गड़बड़ कर दी है .अब वो बात जो मैंने पहले की थी की मैंने वोटर्स का ईमान जगाया था ,और आज मैं  खुद ही मुश्किल में हूँ की वोट करूँ या नहीं .वैसे हरियाणा  में  इस  बार  जनमत  बहुत साफ़   नज़र आ  रहा  है .

इस बार के चुनावों में सत्ताधारी दल के खिलाफ कोई भी ,विपक्षी दल मजबूत  नहीं दिख रहे हैं .मुख्यमंत्री हूडा  ने बेशक कुछ जगह काफी अच्छा  काम किया है पर कहीं जगह वो अपनी  कुछ बड़ी और बहुपर्तिक्षित परियोजनाओं को पूरा नहीं कर पाए या कहें तो अमलीजामा नहीं पहना पाए .सोनीपत में बन रही राजीव गाँधी एजूकेशन सिटी  ४ साल में भी सिर्फ २ कदम ही चल पायी .साथ ही साथ वर्तमान सरकार बिजली के मुद्दे पर अपनी वाही वाही लूटना चाह रही है पर सचाई तो ये है की जो भी बिजली हरियाणा  में बनेगी उसका आधा हिस्सा तो  दिल्ली  को जायेगा .
....................
कांग्रेस के अलावा किसी भी राष्ट्रीय   दल का हरियाणा में जनाधार  नहीं है. हरियाणा में आया राम गया राम और गठबंधन राजनीती  बहुत रही है .और गठबंधन राजनीती न तो सफल रही है ना ही बहुत साफ़ सुथरी .और इसका नतीजा न केवल जनता बल्कि खुद उन दलों को भी भुगतनी पड़ी जो सत्ता में थे .पिछले सत्ता समय में इनेलो के करता धर्ताओं ने कुछ ऐसे काम किये की उनके खुद के लोग भी उनसे अलग हो गए .और जहाँ तक जनता की बात है तो जनता तो नाराज़ हो ही गयी .और इस बार भी इनेलो के साथ कुछ अच्छा होता नज़र नहीं आ रहा .वहीँ दूसरी तरफ भजनलाल की पार्टी हंज्का शायद अपने परिवार के दम पर १-२ सीट ले जाये तो  बहुत बड़ी बात होगी .
सुमित

Monday, September 28, 2009

" रावण अभी जिन्दा है "

" रावण अभी जिन्दा है "
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विजयादशमी पर्व की शुभकामनाये

Thursday, September 24, 2009

राजा तुम दुखी हो............. ?




राजा तुम दुखी हो............. ?
बुधवार की घटना है, मुख्यमंत्री ने बुधवार को जो कहा गुरुवार को अमल में लाया शुक्रवार ,शनिवार ,रविवार को समय के हिस्से में बहुत सारी बाते खुद व खुद अमल में आ जायेगी । , खुलती परतों से कोई आहत हो तो हम बता दें कइयों को राहत किसी एक को आहत करने से मिलती हो तब यह कदम ज्यादा सर्वश्रेष्ठ होता है या कहलाता है। आखिरी में एक सवाल है।
बुधवार की घटना थी -

कोरबा के एक प्लांट में चिमनी गिरने से धरती के मजदूर जिनकी संख्या 35 है वे मर गए। चिमनी में आग लगी थी। कम्पनी डी.जी.सी.एल. है।
मजदूरों के हितैषी, संवेदनशील, जननायक दयालू -कृपालु (आपके पास और कोई उपमा/या विशेषण हो तो उसे जोड़कर पढ़े) मुख्यमंत्री ड़ॉ. रमन सिंह ने इस हृदय विदारक घटना पर पत्रकारों को मोबाईल पर जो एसएमएस भेजकर अपनी प्रतिक्रिया दी वह थी यह :- क्रमशः आगे पढ़े
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Tuesday, September 22, 2009

क्या विज्ञापनो से प्रदेश " अव्वल" बनेगा ?



" अव्वल" हिंदी का साधारण शब्द लेकिन हम सब के जीवन में खास अहमियत रखता है हमारा सारा जीवन इस " अव्वल" शब्द की पदवी को हासिल करने में चला जाता है कुछ लोग इसे हासिल कर लेते है तो कुछ हसरत लिए दुनिया से चल देते है हर मुकाम पर अपने और अपने खास लोगो को अव्वल देखने की चाह हमेशा हमारे मन में हिलोरे मारते रहती है देश की बात करे तो कर्ज लेने में " अव्वल", नेताओ की बात करे तो झूट बोलने में " अव्वल", जनता है तो ...गलत जनप्रतिनिधि चुनने में " अव्वल" ,...... अधिक पढ़ें http://bhadas4cg.com/



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