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Monday, August 17, 2009

नए फ्लेवर में नशे के बाजीगर परोस रहे है धुम्रपान का सामान " हुक्का रेस्टोरेंट "



आप सभी को याद होगी गाँधी जयन्ती 2 अक्तूबर, 2008 से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ को प्रतिबंधित कर सरकार ने धुम्रपान करने वालो की शामत ला दी थी ,आज वही सरकार धूम्रपान की हिमायती बन नशे के बाजीगर के साथ मिल कर लोगों की जेबे निचोड़ने नए जुगाड़ में लगी है ऐसा मै नहीं कहता सरकारी आदेशो की धज्जिया उडाते , नियम कानून को ताक पर रख मुह चिढ़ते " हुक्का रेस्टोरेंट " जो हिन्दुस्तान के पाश ईलाके से लेकर ,गली कूचो में धड्ले से चलाये जा रहे उनको देख के तो कम से कम यही कहा जा सकता है , जब हर तरफ धूम्रपान’ के प्रतिबंधित का प्रयास कर स्मोक फ्री जोन बनाने की पहल जा रही हो ऐसे में खुले आम " रेस्टोरेंट " की आड़ में " हुक्का रेस्टोरेंट " स्मोक फ्री जोन बनाने की बात करने और प्रयास में जुटे लोगो के मुह में तमाचा है
गाँधी जयन्ती 2 अक्तूबर, 2008 से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर जीएसआर 417 (ई) दिनांक 30 मई, 2008 के अनुरूप केन्द्र सरकार ने ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ से संबंधित नियम संशोधित करके पूर्णत लागू कर दिया है। स्मोक फ्री बनाने के उद्देश्य से संशोधित नियमों के अन्तर्गत सभी सार्वजनिक स्थानों पर सख्ती से निषिद्ध है।
‘सार्वजनिक स्थलों’ में आडिटोरियम, अस्पताल भवन, स्वास्थ्य स्थान, मनोरंजन केन्द्र, रेस्टोरेंट, सार्वजनिक कार्यालय, न्यायालय भवन, षिक्षण संस्थान, पुस्तकालय, सार्वजनिक यातायात स्थल, स्टेडियम, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, कार्यषाला, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, रिफ्रेशमेंट रूम, डिस्को, कॉफी हाऊस, बार, पब्स, एयरपोर्ट लॉज आदि शामिल किए गए हैं। इस एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति उल्लंखन करेगा उस पर 200 रूपये के आर्थिक दण्ड के साथ दंडात्मक कार्यवाही करने का प्रावधान किया गया है। इस एक्ट के तहत यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन होटलों के पास 30 या अधिक रूम अथवा रेस्टोरेंट के पास 30 व्यक्तियों की क्षमता की सीट अथवा अधिक तथा एयरपोर्ट को अलग धूम्रपान क्षेत्र अथवा जगह, नियमों के द्वारा जैसा आवष्यक हो को प्रदान/रखना होगा। अधिनियम के तहत मालिक, प्रोपराइटर, प्रबन्धक, सुपरवाइजर अथवा सार्वजनिक स्थानों के मामलों के प्रभारी यह सुनिष्चित करेंगे कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थलों में धूम्रपान न करें, अधिनियम की अनुसूची-2 में वर्णितानुसार बोर्ड महत्वपूर्ण स्थलों तथा सार्वजनिक स्थल के प्रवेश द्वारों पर विषेष रूप से नियमों को प्रदर्षित करें और धूम्रपान हेतु दी जो वाली एस्टेªज, माचिस, लाइटर तथा अन्य सामान सार्वजनिक स्थल में मुहैया नहीं कराई जाएगी।
अमेरिका, यूएई, दुबई, फ्रांस सहित कई बड़े देशों में प्रतिबंधित नशा शीशा चुपके-चुपके हिंद्दुस्तान में पैठ जमा चुका है। नशेड़ियों के आम ठिकानों से इतर यह हुक्का आलीशान रेस्टोरेंट में खुलेआम परोसा जा रहा है। इसका नजारा छत्तीसगढ के गली कूचो पाश ईलाकों में आसानी से देखा जासकता है जाहिर है इसके शौकीन मोटी जेब वाले ही हैं।
हर कश में लगभग 4 हजार रसायन वाला शीशा का हुक्का डॉक्टरों के अनुसार भी अत्यधिक घातक है , जिसके ४३ रसायन घातक यानी कैंसर कारक होते हैं। जैसा कि उन्होंने बताया, किसी रेस्तरां, होटल या अन्य कहीं भी शीशा का धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के साथ पास बैठे लोगों को भी कई घातक रोग लग सकते हैं।
गौरतलब है की भारत में तत्कालीन यूनियन हेल्थ मिनिस्टर अंबूमणि रामदास ने डबल्यूसीटीओएच की चौदहवीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक स्थानों, होटलों, बीयर बारों और रेस्तरां में इस तरह के नशे को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और कई वैज्ञानिक प्रमाणित कर चुके हैं कि शीशा की लत छोड़ना हेरोइन और कोकीन से भी ज्यादा कठिन है।
बावजूद इसके नशे के बाजीगर ने लोगों की जेब निचोड़ने नए जुगाड़ के साथ " हुक्का रेस्टोरेंट " को बाजार में उतरा । शान से हुक्का गुड़गुड़ा रहे लोगो को मालूम नहीं है कि धुएं के साथ उनकी रगों में अरब मुल्कों से आया वहां का पुराना नशा ‘शीशा’ घुल रहा है, जो फेफड़ों के कैंसर जैसी घातक बीमारी का सबब भी बन सकता है। हालात से बेखबर पुलिस और प्रशासन की उदासीनता के चलते नया धंधा आसानी से चांदी काटने का जरिया बन गया है। विदेशों में इस तरह का नशा मुहैया कराने वाले रेस्तरां कारोबारियों के खिलाफ एंटी ड्रग्स कानून के तहत कार्रवाई के सख्त निर्देश हैं। जानकारों की मानें तो यहां शातिर लोगों ने इसका तोड़ भी फ्लेवर्ड शीशे के रूप में निकाल लिया है। मैलेशिश (शीरा) के साथ टेबोनल या मसाल या जर्क के गर्म होने पर शीशा तैयार होता है। टेबोनल, जर्क और मसाल निकोटीन व तंबाकू युक्त पदार्थ हैं।

कैसे बनता है शीशा
विशेषज्ञ बताते हैं मैलेशिश (शीरा) को हुक्के के जार में भरकर ऊपर रखी प्लेट में टेबोनल या मसाल या जर्क डाला जाता है। फिर इसे नीचे लगे बर्नर से गर्म कर किया जाता है। हुक्का पाइप से यह कश शीरा में होता हुआ पीने वाले के मुंह तक पहुंचता है। बॉडी वाल्व से सैट करके इसे खींचने की मात्रा को कम या ज्यादा किया जा सकता है।
बहरहाल शहर में शीशा कई नए फ्लेवर में परोसा जा रहा है यह नाश ,इसमें वनीला, नारियल, गुलाब, जैसमीन, शहद, आम, स्ट्राबेरी, तरबूज, पुदीना, मिंट, चेरी, नारंगी, रसभरी, सेब, एप्रीकोट, चाकलेट, मुलेठी, काफी, अंगूर, पीच, कोला, बबलगम और पाइनएपल आदि शामिल हैं। और ये फ्लेवर ही तो है । लाइट नशा है, नुकसानदायक नहीं है। इस दलील के साथ लोगों को हुक्के , धुम्रपान की और अग्रेषित किया जाना और लत का शिकार बनाना कहा तक सही है जबकि केंद्र और विश्व स्तर पर धुम्रपान छुडाने के लिया अथक प्रयास किये जा रहे है सब कुछ जानकर भी लोग इसके शिकार हो रहे हैं,ये कैसा भारत है ये कैसी आजादी , पुरे विश्व में जो प्रतिबंधित हो वह हिन्दोस्तान की शान बन रही और शिकार हो रहे है हिन्दोस्तान की युवा पीढी जिसे नेहरु से लेकर गाँधी सवारने और सजोये रखने की बात कहते आये क्या ये क्या हुक्का रेस्टोरेंट जायज है ।

जवाब आपका

अपनी राय या विचर जरुर भेजे

यदि किसी रेस्तरां या सार्वजनिक स्थान में ऐसा हो रहा हो तो शिकायत करें।यदि किसी रेस्तरां या सार्वजनिक स्थान में ऐसा हो रहा हो तो शिकायत करें। छोटे बच्चों को यदि कोई व्यापारी या रेस्तरां संचालक तंबाकू या इससे जुड़े उत्पाद दे रहा है तो उसके खिलाफ शिकायत जरूर करें

Friday, August 14, 2009

आज का सवाल


आज का सवाल :- क्या हम आजादी का पर्व परंपरा में मानते है, पवित्र मन से ?
"मानवता का हो गया अस्त, फिर भी १५ अगस्त "
आपके विचार आमंत्रित है
cg4bhadas.com

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एंव शुभकामनायें.. जय हिंद.. जय भारत..


चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ

चाह नहीं मैं प्रेमी माला में
बिंधप्यारी को ललचाऊँ

चाह नहीं सम्राटों के शव पर,
हे हरि डाला जाऊँ

चाह नहीं देवों के सर पर चढूँ,
भाग्य पर इठलाऊँ

मुझे तोड़ लेना बन-माली,
उस पथ पर देना तुम फेंक

मात्रभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जायें वीर
अनेक!
माखन लाला चतुर्वेदी की ईन पंक्तियों को याद करते हुए जब एक पुलिस अधिकारी से अनायास देशभक्ति के माहोल में जब वन्देमातरम की.......
http://cg4bhadas.com/


Sunday, August 9, 2009

इनके बाद ये सौभाग्य किसे मिलेगा.....


इनके बाद ये सौभाग्य किसे मिलेगा.....
सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

स्वाइन फ्लू के कहर से बेखबर छत्तीसगढ सरकार



सतर्कता के दावे के बावजूद स्वाइन फ्लू ने देश को झकझोर कर रख दिया और देश भर में स्वाइन फ्लू संक्रमण के मामलो और उससे होने वाली मृत्यु में इजाफा जारी है .जिसके चलते देश में स्वाइन फ्लू की चपेट में आए लोगों की तादाद 711 तक पहुंच गई है.

आसानी से पकड में नहीं आने वाली की स्वाइन फ्लू की जांच और दवाई दोनों ही काफी महगी है अगर हम इसे अपने प्रदेश छत्तीसगढ के सन्दर्भ में देखे तो आर्थिक रूप से पिछडे हमारे प्रदेश में ग्रामीण अंचलो में सामान्य बीमारी से निपटने लिए नियमित डाँ नहीं , ऐसे में स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से निपटाना तो दूर की बात है संक्रमण से फैलाने वाले स्वाइन फ्लू के लिए बिग बी अमिताभ बच्चन जैसे महानायक ने चिंता जाहिर करते हुए मीडिया से अपील की है कि वह देशवासियों को इसके खतरे से बचाने का अभियान चलाएं जिसमें वह स्वयंसेवक की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। पर इन सब से बेखबर छत्तीसगढ सरकार को शायद इस बात का इंतजार है यहाँ पहले स्वाइन फ्लू संक्रमण का मामला तो सामने आये . जिसके चलते लाखो रु विज्ञापन पर खर्च कर जनता को अपने बखान गिनाते नहीं थकने वाली छत्तीसगढ सरकार स्वाइन फ्लू जैसे संक्रमित बीमारी से बचाव के या जन जाग्रति से कोसो दूर है वैसे अच्छी खबर यह है की अभी तक छत्तीसगढ में स्वाइन फ्लू ने दस्तक नहीं दी है और संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है पर यह सरकारी उदासीनता और जागरूकता के आभाव के चलते भी संभव है
बहरहाल साक्षरता में पिछडे इस प्रदेश में समय रहते स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा घातक बीमारी से बचाव , जागरूकता की पहल नहीं की गई तो हो सकता है की इसके परिणाम धातक हो और बहुतो को स्वाइन फ्लू का कहर लील जाये जिसकी भरपाई फिर ना की जा सके
http://bhadas4cg.com/index.php?option=com_content&view=article&id=148:2009-08-09-09-37-10&catid=41:2009-03-24-16-08-12&Itemid=62

Thursday, August 6, 2009

बी स एन ल करेगा अब आपके घर के पास में ही वसूली : बिल की


आज सबेरे अखबार में पढ़ा की भारत संचार निगम लिमिटेड याने बी स एन ल छत्तीसगढ में नई योजना शुरू करने जा रही है जिसका कहना कुछ ऐसा है बिल बुगतान की असुविधा को ख़त्म करने के लिए बी स न ल ने किसी निजी कंपनी से करार कर बहुतायत में बिल भुगतान या यु कहे की आपके घर के आस पास ही वसूली सेंटर खोलने का निर्णय लिया है जिसके लिए जगह - जगह काउंटर खोलने का प्रावधन भी है पर वो ये भूल गए की वे अपना ध्यान वसूली से हटा कर सुविधा देने पर भी लगते तो शायद उपभोक्तो को राहत मिलती ४०% कनेक्शन तक पहुच चुकी भारत संचार निगम लिमिटेड में ब्राड बैंड याने इंटरनेट ने फिर जान फुक दी और वो फिर से हरा भरा हो लहलहा उठा , बावजूद उसके आज भारत संचार निगम लिमिटेड ब्राड बैंड का कनेक्शन बाटने तक ही सीमित है . ब्राड बैंड की स्पीड और लिंक फेल जैसी परेशानी से आज हर कोई वाकिफ है तो सुविधा और सर्विस से कोसो दूर उपरोक्त न्यूज़ सुनने मिले तो यही कहा जा सकता है की बी स एन ल ने भी छत्तीसगढ को सरकारी कर्मचारी की तरह दुधारू गाय ही समझ लिया है और ठेकेदारी प्रथा में विश्वाश रखने वाले बी स एन ल के शीर्ष अधिकारियो ने फिर से एक नया शगूफा छोड़ दिया
बहरहाल बी स एन ल की कार्य प्रणाली किसी से छुपी नहीं है तो उन्हें मेरा सुझाव यह है की अगर कनेक्शन बाटने के बाद सुविधा याने सर्विस पर भी तवज्जो दे और जहा वे घर के पास बिल जमा करने के लिए काउंटर खोलने की बात कर रहे है क्या वे उसी तरह घर के पास ही उपभोक्ता के कम्प्लेंट भी सुनेगे या उसे अनदेखा कर देगे मतलब वसूली के लिए पास में काउंटर खोल रहे तो उसी तरह कम्पलेंट और सुविधा के लिए भी सुलभ पहुच किसी व्यवस्था का कोई प्रावधान है की बस यु ही .........................

Saturday, August 1, 2009

इंजिनयरिंग कालेजो के प्रचार के नए हथकंडे


छत्तीसगढ में थोक के भावः खुल रहे इंजिनयरिंग कालेजो को देख चिंता लाजमी है लगभग ५० की संख्या पार कर चुके इन इंजिनयरिंग कालेजो ने काउंसलिंग में छात्रों को लुभाने प्रचार का नया तरीका इजात किया है हैरत में डालने वाले इस नए तरीके से इंजिनयरिंग में प्रवेश हेतु काउंसलिंग में आये छात्रों और उनके माता पित्ता को प्रोतसाहित तो किया जाता है और उन्हें पता भी नहीं चलता आप भी इसे सुनने के बाद हैरत में पड़ जायेगे या हो सकता है आप में से भी किसी का इनसे सामान हुआ हो
दरसल बात कुछ ऐसी है की मेरे करीबी रिश्तेदार के बच्चे के प्रवेश इंजिनयरिंग में कराने मेरा सामना इंजिनयरिंग प्रवेश में होने वाली काउंसलिंग से पड़ा मेरा जाना लाजमी था सब कुछ तय था की हमें किस कालेज और किस ब्रांच में अड्मिशन लेना है उसका एक और कारण था की मेरे एक रिलेटिव जो मेरे करीब में है उनका इंजिनयरिंग कालेज है और संस्थान की रिपोर्ट और रेंकिंग भी ठीक है अब भला कोई घर का कालेज छोड़ बहार क्यों अड्मिशन लेगा फिर भी हमने सारे आप्शन खुले रखे थे क्यों की सवाल कैरियर से जुडा था और कालेज ४ साल ही काम आएगा पर ब्रांच जीवन भर सो हम सभी मानसिक तौर से तैयार हो अपनी पारी का इंतजार करने लगे 2nd पारी में होने वाली काउंसलिंग से पहले पहुच स्थिति का जायजा लिया और परिसर में ही रुककर पहले से चल रही काउंसलिंग और ऊससे भरने वाली सीटो का आकलन करते रहे हम वही आस पास काउंसलिंग में आये लोगो से भी चर्चा कर सलाह मश्बरा कर रहे थे एक और लड़की बाजु में ही खड़ी थी उसने भी आकर हमसे बात की बताया की वो अपने छोटे भाई का इंजिनयरिंग में अड्मिशन कराने आई है और इस तरह चर्चा को आगे आगे बढ़ते हुए हम सभी ने अपनी सुचानावो - जानकारी का आदान प्रदान किया इस बीच उसमे अपने छोटे भाई का अड्मिशन अमुख कालेज में क्यों और उसके फायदे के बारे में बताया बहुचर्चित प्रख्यात कालेज होने से उसके रैकिंग और स्कोप जैसे कैम्पस सिलेक्शन की प्राथमिकता पर जोर दिया जो स्वाभाविक भी था सो सब बात हो ही रही थी अचनक स्पीकर में घोषणा प्रारम्भ हुई और २nd पारी काउंसलिंग प्रारंभ होने पर हम सभी अपने अपने बच्चो के अड्मिशन में लग गए मै भी अपने दाखिला सम्बन्धी कार्य में वस्त हो गया और और इस तरह अड्मिशन प्रकिया पूर्ण कर हम सभी अपने अपने गंतव्य की और चल दिए
अब शाम को मैंने उस लड़की जिससे हम सभी ने काउंसलिंग पूर्व बात की थी व्वाहरिकता के नाते फोन किया और उसे उसके भाई के अड्मिशन पर बधाई और हमारे बच्चे के अड्मिशन की बात बता दी जवाब तलब के बात ख़त्म हो गई अब दुसरे दिन उसका फोन आया और कुछ और बात करने की पहल शुरू हुई बात बात में उसने कुछ माफ़ी जैसे शब्दों का इस्तमाल किया जो मेरे समझ से परे था समझ में ना आने से मैंने ऊससे जानना चाहा की आखिर बात क्या है चुकी मै एक बच्चे के अड्मिशन के सिलसिले में वहा गया था उसने मेरी उम्र ज्यादा आक कर मुझे अंकिल के संबोधन किया और उसके मन में इस बात को लेकर ग्लानी थी की उसने मुझसे झूठ बोला सो उसने सशर्त सुरक्षा का हवाला दे सारी बात बता दी बात सुन के मेरे होश उड़ गए बात ही कुछ ऐसी है आप भी सुनिए
उसने बताया की उसने अपनी इड़ेन्टिटि छुपाई जिसके लिए वो शर्मिंदा थी मेरा जवाब था की ये इतनी बड़ी बात नहीं है की इसके लिए आपको माफ़ी मागनी पड़े... वैसे भी लड़कियों को अपनी इड़ेन्टिटि एकदम से नहीं बतानी चाहिए और आपकी इस बात से मै सहमत हु सो इसे जाने दीजिये और मै उन बातो को नजरंदाज कर बात आगे बढा दी बात यहाँ ख़त्म नहीं शुरू होती है उसके बाद उसने परत दर परत जो जानकारी मेरे से बांटी सब कुछ साफ समझ आने लगा पर इसमें मैंने सुरक्षा के मद्दे नजर उपरोत इंजिनयरिंग कालेज का नाम और उस लड़की का नाम हटा दिया है अन्यथा उस लड़की जिसने मुझे सब बताया वो कही परेशनी में ना पड़ जाये "जी हा उसने कहा की उसके किसी भाई का अड्मिशन वहा नहीं था मै सब कुछ शांत मन से सुनता रहा मुझे लगा चलो ये भी ठीक है फिर उसने एक और भेद उजागर करते हुए कहा की वो खुद इंजिनयरिंग 5th सेम की छात्रा है जिस कालेज की वो काउंसलिंग पूर्व पैरवी कर रही थी की वहा अपने भाई का अड्मिशन वहा करा रही है मैंने ये भी सहा पर अब मुझे समझाते देर न लगी और मेरा सिक्स सेंस जाग गया और मेरी समझ में आ गया की काउंसलिंग पूर्व वो अपनी जिन बातो पर जोर दे रही थी वो उसी कालेज की है और वहा वो सुनियोजित तरीके से अलग अलग ग्रुप में लोगो से मिलने उम्हे और उनके मतापित्ता को प्रमोट करने अपनी पहचान जिसमे उनकी पढाई और निवास स्थान भी गलत होता है छुपा के कालेज प्रशासन के कहने से आई है जैसे की उसने मुझसे पहले कहा था की वो कामर्स की पढाई कर रही है वो सब गलत था इस तरह अपने ही कालेज से मिले आदेशो के तहत वे सभी लड़के और लड़किया अलग अलग दिन अपने कालेज के प्रचार में लगे रहते है लोगो को प्रमोट करते है की वे भी खुद किसी का अड्मिशन करा रहे है ऐसा माहोल बनाते हुए ये सभी काम करते है इसके लिए बाकायदा उनके कालेज प्रशासन उन्हें ट्रेनिग देता है उन्हें झूठ बोलने वाले और अच्छे से प्रजेंट करने की कवायद सिखाता है अच्छे से पर्जेंट करने वालो को अलग कर इस टास्क में शामिल किया जाता और उन्हें ये भी बताया जाता है की आप अपनी पहचान किसी से नहीं बतायेगे तो आप ही अंदाजा लगाइए की क्या इस तरह का भावनात्मक धोखेबाजी कौन्सिलिंग में इंजिनयरिंग कालेजो दाखिले के लिए आये लोगो के साथ नहीं की जा रही है ? और दूसरी और उसी कालेज में पढने वालो बच्चो से ऐसे कार्य करना ठीक है ?
क्या ज्यादा छात्रो की लालच में इंजिनयरिंग कालेज प्रशासन नीचता पर नहीं उतर आय है ? हो सकता है की ये आप में से किसी की नजर में सही भी हो पर क्या कोई ये बतायेगा की उसी कालेज के सीनियर छात्रो से ये सब करवाना ठीक है ?
बहरहाल इसा घटना के बारे में जब मै सुन रहा था सहसा ही मेरे मन में खडक सिंग और ऋषि मुनि याद आ गए जिसमे ऋषि मुनि ने घोड़ा चोरी करने वाले डाकू से कहा की ये बात किसी से ना कहे वर्ना लोगो का भिखारियों पे से विश्वाश उठ जायेगा कुछ ऐसा यहाँ भी हो रहा है

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