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Wednesday, April 29, 2009

'भड़ास फॉर यूपी' के व्यवस्थापक पद हेतु आवेदन

प्रिय पाठकों और सदस्यों ! मैं (सलीम खान) बड़े खेद के साथ यह सुचना देना चाहता हूँ की इस ब्लॉग (भड़ास फॉर यूपी) को मैं समयाभाव के कारण उचित ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ. यह ब्लॉग यूँ ही सुचारू रूप से चले इसके लिए मैं आप सभी से यह कहना चाहता हूँ कि अगर आपको लगता है कि आप इस मंच को ठीक उसी तरह से सेवा कर सकेंगे जैसा कि मैं करता आया हूँ तो आप मुझे swachchhsandesh@gmail.com पर अपने बायोडाटा के साथ मेल कर दें | आप यह ज़रूर बताएं कि आप अंतरजाल पर रोज़ कितना समय देते है और आपका प्रोफेशन क्या है| 

अपनी एक पासपोर्ट साइज़ फोटो और मोबाइल नंबर को मेल करते वक़्त देना ना भूलें |  

आपकी मेल के मिलने के एक सप्ताह के भीतर चयन होने की सुचना दे दी जायेगी| हालाँकि भड़ास फॉर यूपी पर एकल व्यवस्थापक की ही आवश्यकता है, परन्तु अगर एक से अधिक उम्मीदवार चयनित हो जाते है तो व्यवस्थापक मंडल का निर्माण किया जायेगा जिसके लिए नियम व शर्तें लागु होंगी और इस ब्लॉग पर शीग्र ही प्रकाशित की जायेंगी |  

आपका  
सलीम खान

Thursday, April 16, 2009

अब न रहा वो सद्दाम का इराक !


पश्चिमी मिडिया में लगातार छपी खोजी रपटों से मार्डेन हिस्ट्री की जघन्यतम हत्या की सच्चाई छन छन कर सुर्खियों में आई थी | जार्ज वाकर बुश, जो अब राष्ट्रपति नहीं रहे, ने विश्व बिरादरी से झूठ बोला था कि इराक के दिवंगत राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन (जिन्हें शहीद कर दिया गया था) नरसंहार के भयावह शस्त्रों के उत्पादन में जुटे थे | अमेरिका के वर्तमान रष्ट्रपति बराक़ हुसैन ओबामा ने चुनाव के समय यह कहा था कि उनके प्रतिद्वंदी जान मैक्कन की रिपब्लिकन पार्टी झूठ के पहाड़ पर खड़ी हुई है और अमेरिका की जनता ही इसका जवाब देगी | हुआ भी यही चुनाव के बाद की तस्वीर साफ़ है, अब वहां बुश की पार्टी हाशिये पर आ गयी और इसी के चलते बुश से पहले ब्रितानिया हुकुमत टोनी ब्लेयर के हाथो से निकल गयी और टोनी ब्लेयर को इराक पर गुमराह करने करने के कारण ही ब्रिटेन के प्रधानमत्री का पद छोड़ना पड़ा | उधर अमेरिका में मुस्लिम से ईसाई बने बराक हुसैन ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने लेकिन विश्व बिरादरी को ज्यादा खुश होने की ज़रुरत नहीं है कि बराक ओबामा के अमेरिका का राष्ट्रपति बन गए हैं| 
बुश का जो हाल हुआ वो तो होना ही था, इराकी पत्रकार ने जूता मारकर उनकी औकात बता दी | इतिहास के कठघरे में बुश अभियुक्त बन कर पेश होंगे, जब इराक पर अमेरिकी नरसंहार की खबर और ज्यादा पेश होंगी और तब से वर्तमान तक हजारों बेगुनाहों की जानों का ठीकरा बुश के सर फूटेगा, मैं तो इसे दुनिया की सबसे बड़ी आतंकी हमला कहूँगा, जो अमेरिका ने इराक पर किया| बुश क्या इससे पहले भी जैसा कि सबको पता है वियतनाम पर रिचर्ड निक्सन की बमबारी के वर्षों बाद उजागर हुई थी | आज सद्दाम हुसैन को राष्ट्रवादी शहीद का दर्जा और खिताब मिल चुका है | उनकी हत्या का प्रतिरोध और प्रतिकार इराक में रोज़ हो रहा है, अमेरिकी सैनिकों (आतंकी घुसपैठिये) और उनके अरब दलाल की बम विस्फोटों में मौतें इसके सबूत हैं| मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ क्या इराक पर अमेरिकी आतंकी हमले से पूर्व वहां इतनी ही अशांति थी, अवश्य आपका जवाब नहीं होगा और आप यह ज़रूर कहेंगे कि पहले वह बहुत खुशनुमा माहौल था | 
उन्नीस साल पहले सीनियर जार्ज बुश ने सद्दाम हुसैन पर पहले बमबारी की थी| प्रतिकार में सदाम हुसैन ने पुत्र और इराकी पत्रकार उनियां के प्रेसिडेंट उदय हुसैन ने इराक के होटलों के प्रवेश द्वार पर बिछे पायदान में बुश की आकृति बुनवा कर लगा दी | महाबली के अपमान का यह नायाब तरीका था | पितृऋण चुकाने का इसके बाद जूनियर बुश ने बिल क्लिंटन के बाद राष्ट्रपति निर्वाचित होते ही बदला लेने के लिए मौके तलाशे और इराक पर बमबारी कर दी | बहाना था इराक में नरसंहार के आयुधों का उत्पादन जो आजतक साबित नहीं हो सका |

सदाम हुसैन का अवसान भारत के लिए राष्ट्रिय त्रासदी थी क्यूंकि वह इस्लामी राष्ट्रनायकों में एक वाहिद सेकुलर व्यक्ति था | केवल चरमपंथी लोग ही उसकी मौत की पीड़ा से अछूते रहे | कारण ? दर्द की अनुभूति के लिए मर्म होना चाहिए | इराकी समाजवादी गणराज्य के दिवंगत राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन अल तिकरिती पर चले अभियोग और फिर सुनाये गए फैसले को महज राजनैतिक प्रहसन कहा जायेगा| 

भारत के हिन्दू राष्ट्रवादियों को याद दिलाना चाहता हूँ कि सदाम हुसैन अकेले मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष थे जिन्होंने कश्मीर को भारत का अविभाज्य अंग माना और ऐलानिया कहा भी | अयोध्या कांड पर बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी तो इस्लामी दुनिया में बवंडर मचा था तो उस वक़्त बगदाद शांत था| बकौल सद्दाम हुसैन "वह एक पुराणी ईमारत गिरी है, यह भारत का अपना मामला है| उन्हीं दिनों ढाका में प्राचीन ढाकेश्वरी मंदिर ढहाया गया| तसलीमा नसरीन ने अपनी कृति (लज्जा) में हिन्दू तरुणियों पर हुए वीभत्स ज़ुल्मों का वर्णन किया| इसी पूर्वी पकिस्तान को भारतीय सेना द्वारा मुक्त करने पर शेख मुजीब के बांग्लादेश को मान्यता देने में सद्दाम सर्वप्रथम थे|

इंदिरा गाँधी की (1975) इराक यात्रा पर मेजबान सद्दाम हुसैन ने उनका सूटकेस उठाया था | जब राएबरेली लोकसभा चुनाव में वे हार गयीं तो इंदिरा गाँधी को बगदाद में स्थाई आवास की पेशकश सद्दाम ने की थी | पोखरण द्वितीय पर अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार को सद्दाम ने बधाई दी थी, जबकि कई राष्ट्रों ने आर्थिक प्रतिबन्ध लादे थे| सद्दाम के नेतृत्व वाली बाथ सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के राष्ट्री अधिवेशनों में शिरकत करते रहे| भारत के राजनेताओं को ज़रूर याद होगा कि भारतीय रेल के लाखों कर्मचारियों को आकर्षक अवसर सद्दाम ने वर्षों तक उपलब्ध कराए| 

उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम में तो इराक से मिले ठेकों से खूब पैसा कमाया| 35 लाख भारतीय श्रमजीवी सालाना एक ख़राब रुपये भारत भेजते थे | भारत को इराकी तेल सस्ते दामों पर उपलब्ध होता था | इस सुविधा का भी खूब दुरूपयोग तत्कालीन रूलिंग पार्टी के नेताओं ने किया था| इराक के तेल पर कई भारतीयों ने बेशर्मी से चाँदी काटी| 

एक दैनिक हिंदी अखबार में एक संपादक श्री के. विक्रम राव ने अपनी इराक यात्रा की वर्णन में यह कहा था कि उसे इराक में के शहरों में तो बुरका नज़र ही नहीं आया था | उन शहरों में कर्बला, मौसुल, तिकरिती आदि सुदूर इलाके थे| स्कर्ट और ब्लाउज राजधानी बगदाद में आम लिबास था, माथे पर वे बिंदिया लगतीं थी और उसे हिंदिया कहती थीं| लेकिन पूरी तरह से पश्चिम का गुलाम हो चुका हमारा मिडिया तो वहां की ऐसी तस्वीर दिखाता कि पूछो मत |

अब की तस्वीर पर अज़र डालेंगे तो मिलेगा की सद्दाम के समय में हुई तरक्की में अब गिरावट आ गयी है बल्कि वह पतन पर है| टिगरिस नदी के तट पर या बगदाद की शादकों पर राहजनी अब आम बात हो गयी है | एक दीनार जो साथ रुपये के विनिमय दर पर था आज रुपये में बीस मिल जायेंगे और अब तो विदेशी विनिमय के दफ्तर यह कहते हैं कि आर बी आई के अनुसार इराकी मुद्रा विनिमय योग्य नहीं है | दुपहियों और तिपहियों को पेट्रोल मुफ्त मिलता था, शर्त यह थी कि ड्राईवर या गाड़ी मालिक उसे स्वयं भरे | और भारत में बोतल भर एक लीटर पानी दस रुपये का है| सद्दाम के इराक में उसके छते अंश पर लीटर भर पेट्रोल मिलता था | अमेरिका द्वारा थोपे गए कथित लोकतान्त्रिक संविधान के तहत इराक के सेकुलर निजाम की जगह अब अमेरिका के दलालों ने ले ली है, जिनमे कठमुल्ले भी हैं| 

लेकिन भाजपाई जो मोहमद अली जिन्ना को सेकुलर के खिताब से नवाजते हैं, सद्दाम हुसैन को सेकुलर नहीं मानेंगे | उसका कारण भी है सद्दाम हुसैन पांचों वक़्त की नमाज़ पढ़ते थे, वहां नमाज़ के वक़्त दुकाने और प्रतिष्ठान बंद हो जाते थे | सद्दाम हुसैन अपने साथ हर वक़्त कुरान की एक प्रति अपने साथ रखते थे| पैगम्बर मोहम्मद (इश्वर की उन पर शांति हो) के साथ साथ ईसा मसीह को भी इसलाम के पैगम्बर में से एक मानते थे| इसका उन्होंने खामियाजा भुगता | अमेरिकी पूंजीवादी दबाव में साउदी अरब के शाह नेशलिस्ट इराक को नेस्तनबुत करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी | साउदी अरब में प्यारे नबी मोहम्मद (ईश्वर की उन पर शांति हो) के जन्मस्थली के निकट अमेरिकी सेना (हमलावर, आतंकवादी) को जगह दी और जन्मस्थली के ऊपर से जहाज़ उड़ कर प्यारे नबी के नवासे के कुरबानगाह पर बम बरसाए |

सद्दाम के डर के मारे अरबी शासकों के लिए यह भी था कि इराकी सेना ने कुवैत पर कब्जा किया है (कुवैत इराक का अभिन्न अंग था) और वह मज़हबी सुधार लाया था | पिछली सदी के चौथे दशक तक कुवैत इराक का अभिन्न अंग था| सद्दाम को दण्डित करने के कारणों की यूरोप अमेरिकी राष्ट्रों ने लम्बी लिस्ट बनाई मगर मुकदमा चलाया पच्चीस साल पुराना घटना के आधार पर | अपराध मडा दुजाईल प्रान्त में 148 शिया विद्रोहियों की (1982 में) हत्या करवाने का |  

मगर इतिहास करवट लेता है | सद्दाम हुसैन भी अब इमरे नाष की भांति इराकी देशभक्त और इस्लामी राष्ट्रवाद के प्रतिक बन रहे हैं, जैसे मिस्र के जमाल अब्दुल और तुर्क के मुस्तफा कमाल पाशा अतातुर्क हैं|

Saturday, April 11, 2009

कैटवॉक करती भारत की जनता

कुछ दिनों से देख रहा हु राजनीति में नए नए प्रयोगों किये जा रहे है सभी का रंग ढंग बदला है कारण एक मात्र सत्ता की चाहत , सभी चाहते है सत्ता सुंदरी का रसपान करना यहाँ मै एक बात जरुर कहना चाहुगा जो मेरी नहीं बल्कि " मोहल्ले " से ली गई है उन्होंने बहुत अच्छी बात लिखी थी "सम्मान भीख में नहीं मिलता और इज्जत बेचारों की बीवी का नाम नहीं हो सकता। पत्रकारों को पहले खुद अपने सम्मान के लिए आवाज उठानी होगी। उन्हें खुद कहना होगा कि हम न तो रैंप पर चलेंगे, न विज्ञापन के लिए कलम बेचेंगे। अगर दम है तो बात करो, दम से बात करो। वरना जोकर लगोगे और जमाना ऐसे ही रैंप पर घुमाएगा।" इन वाक्यो में बहुत दम है पर इसे वृहत रूप में देखे तो ये देश पर भी लागु होती है चंद लोगो को रैंप पर कैटवॉक क्या कराया सारे बरस पड़े उन पर , इसमें बुधजिवी से लेकर बाकि भी शामिल थे..... पर उनका क्या जो ६० साल से हमें और सारे देश को कैटवॉक कराते चले आरहे है हा मै राजनीति की ही बात कर रहा हुं पुरे ६० साल से भी ज्यादा हो गए जनता और देश को कैटवॉक कराते कभी कपडे के तो कभी बिना कपडे के तब हम क्यों कुछ नहीं कर पाए मुझे याद है एक बात और किसी ने लिखा था गर्व से कहो हम चूतिये ये भी सच है  









अब अभी नहीं समझे चलिए और बताता हु






इन सभी महानुभाओ को तो आप पहचानते ही होगे जी हां ये वहीहै भारत के भाग्यविधता माफ़ कीजिये भावी भारत के भाग्य विधता जिन्होंने हर ५ साल में वही बाते करने , दुहराने , सपने दिखाने का बीडा उठाया है और हासील सिफर , इस बार फिर वैसा ही या उससे कुछ ज्यादा हो तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी अब हम २१ वि सदी में जो है सवाभाविक है सब कुछ बदलेगा तो भारतीय राजनीति क्यों नहीं इन सब के बावजूद सब खुद को बुद्धिमान और और दुसरे को ....... साबित करने में लगे है राजनितिक गठजोड़ और सत्ता सरकार के लिए लुका छिपी का खेल किसी से छुपा नहीं जग जाहिर है इतने पर भी हिंदुस्तान की जनता का मन नहीं भरा और वो फिर से एक संसद कांड और न जाने कितने गठजोड़ घोटालो को आमंत्रित करने फिर से वोट डालने वाले है ये मै इस लिए कह रहा हु क्यों की आज तक तो सब ऐसे ही चलता आया है तो अब क्यों नहीं और क्या बदलेगा मै किसी पार्टी राजनीति का पक्षधर नही हु मै जो कह रहा हु वो तथ्यों के आधार पर ही ना कि वास्तविकता से परे साहित्यकार की तरह महज कल्पना मात्र. जो वर्तमान और उनकी परेशनियों को भूल कल्पनाओ में जीता है

चलिए इनसे पूछते है इन्हें छठ्वां वेतन मान मिला की नहीं ? सामान्य केंद्रिय कर्मचारी ६०००० और ४०००० वेतन पा रहा है इसके पास क्या है ?








ये है ६० साल में हमारा राजनीत परिपेक्ष. युवा की बात करे तो उनकी अपनी परिभाषा है उन्हें देश से कोई मतलब नहीं उन्हें मतलब है युवा नेता से जिसके भाषण की शुरुवात केंद्र ने पैसे भेजा और उसका उपयोग नहीं किया यही है ५ मिनिट का भाषण इसके आगे सब ख़त्म उसके बाद प्रश्न उत्तर काल शुरू हो जाता है हमारे युवा शायद दुसरे मनमोहन सिंग की फिराक में है या यु कहे इन्हें वर्तमान प्रधानमंत्री बहुत पसंद है वैसे इसमें इन युवाओ का भी दोष नहीं क्यों की वे अभी तक हायर एजुकेशन , बड़ी नौकरी [वो भी विदेश में ] ,सुन्दर लड़की और पब संस्क्रति से ही नहीं उबर पाए है।

मुझे याद है वर्ष २००० में मेरा सामना गैस कनेक्शन के सिलसिले में दुकान दार से हुआ जिसने मुझे सलाह दी की आप गैस कनेक्शन ट्रांसफर करा के क्या करेगे आप अभी नया ले लीजिये जिस गैस कनेक्शन को मैंने सांसद और विधायक कोटे से प्राप्त किया था वो ऐसे ही चला गया . अब क्या करता ये थे भाजपा के ५ साल के कारनामे ६० ६५ साल में आज तक कभी गैस कनेक्शन और गैस इतने सुलभ कभी नहीं देखे जितने वर्ष २००० में थे ।

ठीक वैस ही व्यवसाय का रूप ले चुकी राजनीति को वश में करने के लिए २००० में ही विधेयक पास हुआ दलबदल कानून और मंत्रीमंडल विस्तार कानून जी हा ९० मंत्री थे साहब युपी में , किसी कवि ने इसका अच्छा उदाहरण देते हुए कहा था कि युपी में थूकना भी है तो देखा कर थूकना पड़ता है की कही मंत्री जी पर ना गिर जाये इसके लिए भी हमें ५० साल लग गए .

गाव में सड़क तो दूर दूर तक दिखाई नहीं देती थी जिसके लिए हर ५ साल में कांग्रेसी वादा करते आये और ५० साल गुजर दिए वह भी इसी कार्यकाल में पूरा हुआ

एक महत्वकान्क्षी योजना और थी भारत के पास जमीन तो बहुत है पर पानी नहीं उसके लिए नदियों को जोड़ने की योजना प्रारम्भ की थी पर वर्तमान सरकार के आते ही सब बंद इन्हें अपने ही फार्म हॉउस में पानी पहुचने से फुर्सत मिले तो ये आपके लिए सोचे अभी तक ६ पंचवर्षीय योजनाये इस देश में पूरी हो चुकी है और सातवी आने वाली है शायद अब बताइए की आप और देश का कितना विकास हुआ है ये सब मै राजनीति से प्रेरित हो कर नहीं बल्कि भारतीयता से प्रेरित हो कर कह रहा हु

भारतीयों पर पोटा और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही और आतंकवादी को रिहा ये है मेरे भारत की महानता अब्ब्जल और कसाब इसका प्र्त्यक्ष उदाहर्ण है ६० साल फिर भी कोई लेखा जोखा नहीं चारो ओर से घुसपैठ और आतंकी गतिविधिया जोरो पर है पर हमारे नेता तो राजनीति में मशगुल है कोई ठोस कार्यवाही नहीं बस कर्ज लो और स्विस बैक में बैलेन्स बढ्वो अगर आप पुरे देश में आंतकवादी गतिविधियों में बंद किये गए कैदियो की सख्या और उन पर होने वाले खर्च का आकडा देखे तो चौकनेवाले तथ्य सामने आयेगे बावजूद इसके मेरा भारत महान और मेरे देश वासी ऊससे ज्यादा महान, महानता में तो हमने बहुत रिकार्ड बनाये है क्या २०० साल की गुलामी ने हमारे ऊपर इतना गहरा असर किया है की आज हम फिर से गुलामी में जीना चाहते है पहले अंग्रेजो की और इन ५० साल वाली सरकार की क्या हो गया है इसलिए दोस्त इसे दोबारा पढो

"सम्मान भीख में नहीं मिलता और इज्जत बेचारों की बीवी का नाम नहीं हो सकता। भारतीयों को पहले खुद अपने सम्मान के लिए आवाज उठानी होगी। उन्हें खुद कहना होगा कि हम न तो शोषित होगे , ना कपडे उतारेगे । अगर दम है तो बात करो, दम से बात करो। वरना जोकर लगोगे और नेता ऐसे ही रैंप पर घुमाते रहेगे ।"


एक भारतीय के आवाज

आगे पढे .....










सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ

पार्टियों के विजापन के आधार पर सरकार


राजनैतिक महाकुम्भ २० - २० की उलटी गिनती शुरू हो गई है और हर राजनैतिक दल सारी ताकत लगा कर अपने अपने चुनाव प्रचार में लग गया लेकिन इन सबके बीच एक और समुदाय है जिन्होंने चुनाव का बीडा उठा रखा है वो है मीडिया जी हा ये वही मीडिया है जिन्होंने साल भर पहले महगाई , परमाणु करार के मुद्दे पर तत्कालीन सरकारकी बखिया उखेड़ने में कोई कसर नहीं छोडी थी लेकिन आज स्थिति अलग है ..... हर चैनेल सर्वे के आधार पर सरकार बना और गिरा रहा है पर इसमें भी राजनीति है आप ध्यान से देखेगे तो पायेगे की बहुत से चैनेलोमे में राजनैतिक पार्टियों के विजापन भी चल रहे है लेकिन उसमे गौर करने वाली बात यह है कि जिसके विजापन के बाद उसकी कि सरकार चैनल में बनती दिखाई देती है मतलब जैसे की कांग्रेस का विजापन तो सरकार और बढ़त कांग्रेस की बता दी जाती है वैसे ही भाजपा के विजापन के बाद दिखाए जाने वाले सर्वेक्षण में भाजाप् को आगे दिखा दिया जाता है महज ये इतिफाक नहीं बल्कि कई बार ऐसा देखने मिल रहा है तो ये कैसा सर्वे आप ही बताइए .लगता है अब सर्वे पार्टियों के विजापन के आधार पर भी किये जा रहे है

मेरी परेशनी ये है यार मेरे ब्लाग में और अलग से ब्लाग बनते जा रहे है


मेरी परेशनी ये है यार मेरे ब्लाग में ओर्र अलग से ब्लाग बनते जा रहे है

Friday, April 10, 2009

जिंदल पर चला जूता


नेताओं पर जूता फेंकने की घटना में इजाफा होता जा रहा है पत्रकार जरनैल सिंह  द्वारा  गृहमंत्री पी चिदंबरम  पर जूता  फेकने के बाद अब कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल को भी एक फ्लाईंग जूते का सामना करना पडा.आज कुरुक्षेत्र में एक चुनावी रैली के दौरान एक रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल ने नवीन जिंदल को निशाना लगाकर जूता फेंका।
  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक  कांग्रेसी नेताओं, उनके वादों और कांग्रेस की नीतियों से नाराज होकर  रिटायर्ड प्रिंसिपल राजपाल ने  नाराजगी जताते हुए कुरुक्षेत्र से कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल पर भरी चुनावी सभा के दौरान उनपर जूता फेंका, लेकिन निशाना चूक गया और जूता नवीन जिंदल को नहीं लगा.हालांकि कांग्रेस का दावा है कि वह शराब के नशे में थे और इस घटना के पीछे विरोधियों का हाथ है। फिलहाल राजपाल को पुलिस ने हिरासत में  लिया ओए पुछ्ताछ के बाद छोड़ दिया 
 

Tuesday, April 7, 2009

गृहमंत्री चिदंबरम पर पत्रकार ने जूता फेंका


गृहमंत्री चिदंबरम पर पत्रकार ने जूता फेंका
इराक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बूश पर जूता फेंकने की घटना भारत में भी तरोताजा हो गई आज नई दिल्ली में मंगलवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिन्दी अखबार दैनिक जागरण के पत्रकार जरनैल सिंह ने भावना में बहकर उन पर जूता फेंका।

Sunday, April 5, 2009

युवाओँ की भड़ास


आज हमारे देश को एक युवा नेतृत्व की सक्त जरुरत है एक युवा ही समाज को बदल सकता है एक युवा ही समाज में फैले आतंकवाद और नक्सलवाद का मुहतोड़ जबाब दे सकता है एक युवा ही हमें निर्णायक और मजबूत सरकार दे सकता हैमगर आज भी हर राजनीतिक पार्टी में सिर्फ और सिर्फ युवाओँ का शोषण हुआ है आज विधानसभा हो या लोकसभा सभी चुनावो में प्रत्याशियौ के जीत का श्रेय युवाओँ को ही जाता है क्योकि युवा ही दिनरात मेहनत कर के प्रत्याशी को सफलता दिलाता हैहर राजनीतिक पार्टी युवाओँ को जोड़ने के लिए उसे ३३% के आरक्षण की बात कहती है मगर चुनाव के दौरान उन्हें टिकट देने की ओपचारिकता मात्र कर दी जाती है और उन्हें चुनाव प्रचार की कमान का झुनझुना पकडा दिया जाता हैआज जहा भी राजनितिक पार्टियों ने युवाओँ को अवसर दिया है वहा यूवा 90% तक खरा उतरा है जबकि ये बुढे नेता टिकट बटवारे को लेकर आपस में लड़झगड़ कार आपसी भीतरघात पैदा क़र पार्टी और अपनी हार का कारण बनते है

आज राहुल गाधी युवाओँ को आरक्षण दिलाने के लिए संघर्ष रत है जिसकी मै प्रशंसा करता हु आज जितने भी आन्दोलन हो रहे है उनका सफल नेतृत्त्व एक युवा ही करता है आज रमन सरकार छात्र हित और युवा हित में एक पैसा का कम नहीं क़र रही है इसी के विरोध में आन्दोलन के डर को कारण आज भा.ज.पा. शासित प्रदेश में छात्र संघ चुनाव में रोक लगा दी गई है मगर भा.ज.पा. छात्र संघ को रोक नही सकती वो छात्र संघ तो रोकसकती है मगर छात्रों के इरादों को नहीं आज छ.ग. में बेरोजगारी दिनों दिन बढती जा रही है मगर बेरोजगारो को नौकरी तो दूर बेरोजगारी भत्ता तक नसीब नहीं हो रहा है
आखीर कबतक हम युवाओँ का शोषण होता रहेगा .........जागो यूवा जागो अपना अधिकार मांगो................{अम्बर जायसवाल पेंड्रा {N.S.U.I प्रसीडेंट}


जाग रहा है युवा सावधान नेता
इससे ये तो समझ में आने लगा है की अब युवा जाग रहा है उसे ये भी पता है कि चुनाव में प्रचार से लेकर पोलिग बूथ में अपने प्रत्याशी की कमान सभालते हुए युवा ही तैनात रहता है , है बावजूद उसके उसे सीर्फ़ ठोकरे ही मिलती है तो बस अब वो दिन दूर नहीं जब नेता तो नाम का नेता होगा ................

Saturday, April 4, 2009

जिसने मदद की वही जेहादी???... जरा सोचिये.."ये कैसी पत्रकारिता???"


जिसने मदद की वही जेहादी???... जरा सोचिये!!! "ये कैसी पत्रकारिता???"

आप सभी का सहयोग चाहिए, ताकि उन तक आवाज़ पहुँच सके जो शीशे के दीवारों के पीछे बैठे खबरों का धंधा और सौदा करते हैं... आवाज़ पहुंचानी पड़ेगी ताकि अपने मानसिक दिवालियेपन से यह समाज का दिमाग न सडाये... जिस माध्यम के ऊपर ज़िम्मेदारी है अराजकता को उजागर करने की वही अराजक हो गया है ...

स्थिति यह हो गयी कि अख़बार उठाओ या न्यूज़ चैनल लगाओ तो पहले अपनी पढाई लिखाई भूल जाओ वरना पागल कर देंगे ये आजकल के पागल पत्रकार... साले... शीशे के पीछे से मुह चिढाते हैं, पत्थर मारने कि कोशिश की तो आपका ही नुकसान... अखबार फाड़ो तो आपके ही पैसे दाण जायेंगे... क्या करे पाठक अख़बार पढना छोड़ दे टीवी केवल नाच गाने के लिए देखे ... या "if you can't avoid it, lie down and enjoy it ... "जैसे विकृत जुमले की तर्ज़ पर हर सुबह अपना मानसिक बलात्कार करवाए ...

ताज़ा प्रकरण जिस महिला ने मुंबई हमलों के दौरान पीडितों की मदद की उसकी तस्वीर आतंकी की तस्वीर बना कर दर्शकों के सामने प्रस्तुत की गई... पूरी ख़बर पढ़ें
Jehadi? me?!
http://www.punemirror.in/index.aspx?page=article&sectid=62&contentid=2009040320090403045805846a9f81381&sectxslt=

"ज़रा सोचिये" "ये कैसा खबरनामा है", ये कैसा न्यूज़ चैनल है ???

सबके ऊपर ऊँगली उठाई ... अब अपने पर ऊँगली उठते देखो...

आओ खिलाएं तुम्हे पाठक दो प्याजा, पाठक मुसल्लम...


हमारे शहर लखनऊ में एक अखबार छपता है, नाम से लगता है कि , सूरज भले ढल जाए इनकी रौशनी ता- क़यामत कायम रहेगी । उजाले का तो भरोसा नहीं पाठकों पर अत्याचार ज़रूर जारी रहेगा... आये दिन नूरा कुश्ती टाइप स्टिंग आपरेशन ...


पहले एक महिला पत्रकार को सड़क पर आधी रात में टहला कर शोहदों से छेड़ छाड़ करवाई। फिर इनकी एक महिला पत्रकार हज़रतगंज स्थित काफ़ी हाउस वाले बरामदे में अधिकारियों को ठण्ड के मौसम में मानवीय मूल्यों का पाठ सिखाने के लिए, एक व्यक्ति के मरने का इंतज़ार करती रहीं और बड़े शान से अगले दिन अपनी फोटूवा छपवाई.

आदरणीय पत्रकार महोदया से कोई पूछे अगर उसे इलाज़ की ज़रुरत थी, तो आप इतनी देर तक उस व्यक्ति के मरने का इंतज़ार क्यों करती रहीं और अगर वो ठण्ड से मर चुका था तो, उसकी मौत पर तमाशा क्यों किया ?? जैसी खबर थी, उसे वैसे ही परोसा जा सकता था।

फिर एक दिन इसी अखबार के अपराध संवाद-दाता (खबरों का दान हम गरीब पाठकों को देने वाले प्रभु) क्वालिस में एके -४७ लेकर बैठे, पुलिस वालों की सतर्कता जांचने के लिए ... ज़ाहिर है सभी फ़ेल हो गए ... अमां मियां जिस शहर में हर दूसरी गाडी में बाहुबली अपने चमचों के साथ बैठकर, हथियार का प्रदर्शन करते हों, वहां किस पुलिस वाले की हिमाकत उस गाडी को रोकने की। बेहतर होता बाहुबलियों के तौर तरीके पर सवाल उठाते ... भला क्यों उठाएंगे। आखिर उनके दरबार में कोर्निश जो बजानी रहती है।

फिर एक दिन वही महिला पत्रकार जिन्होंने एक आदमी की मौत पर तमाशा बनाया , जेड गुडी के मरने पर सारे मर्द जाति को सरवाइकल कैंसर फैलाने का जिम्मेदार बता बैठीं ... इन्टरनेट से चेपा हुआ अनुवादित आर्टिकल ... अनुवाद करने में इधर का उधर हो गया । कल तो और भी अति हो गयी॥ इन्ही के स्वास्थ्य विशेषांक में एक महिला चिकितासक ने लिखा - एक से ज्यादा पुरुष साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाने से सरवाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। मतलब कि अगर खुदा न खास्ता किसी महिला को सरवाइकल कैंसर हो गया तो, इस "उजाले" भरे ज्ञान से उसके और उसके पति के चरित्र की मौत पहले हो जायेगी, कैंसर तो उसे अपना ग्रास बाद में बनाएगा।

पता नहीं उच्च प्रबंधन नॉएडा में कितनी ऊंचाई पर बैठा है कि उसे अपने सम्पादकीय विभाग की निरंतर होने वाली गलतियाँ नहीं नज़र आ रही हैं। ज्यादातर पत्रकारों ने अपने आप को खुदा और पाठकों को निरा मूरख समझ लिया है ... कूपन से पाठक बटोरा तो जा सकता है , लेकिन यदि अखबार की क्वालिटी वही हुई, जो कूपन के बदले मिलने वाले "उपहार रुपी रिश्वत" की होती है तो पता नहीं कितने आपकी रद्दी साढ़े तीन रुपये में खरीदेंगे और कब तक ? घबराने की ज़रुरत नहीं, अखबार के मालिकों को मंदी की मार का हवाला दिया जा सकता है।


पंजाब में आतंकवाद के दौर में यही तो हुआ था न, व्यक्तिगत दुश्मनी भी आतंकवाद के धर्मखाते में चढा दी गयी थी. वरिष्ठ कचरा परोस कर अपने अपने सिंहासन पर काबिज रहेंगे और कनिष्ठों पर गाज गिरती रहेगी...

http://vikshiptpathak.blogspot.com/

Friday, April 3, 2009

एचटी मीडिया बनाम भड़ास4मीडिया : सुनवाई की अगली तारीख 24 जुलाई


शैलबाला-प्रमोद जोशी    प्रकरण से संबंधित खबरें भारत के नंबर वन मीडिया न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया पर पब्लिश किए जाने के खिलाफ एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर केस की पहली सुनवाई आज हुई। वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से दायर केस में भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह और तीन अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। हाईकोर्ट में दर्ज इस केस संख्या सीएस (ओएस) 332/2009 की सुनवाई हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 24 में विद्वान न्यायाधीश अनिल कुमार 

ने की।

इस दौरान एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से हाजिर हुए वकील ने केस निपटारे तक भड़ास4मीडिया पर एचटी मीडिया और इससे जुड़े लोगों से संबंधित खबरें प्रकाशित न करने देने का आदेश पारित करने का अनुरोध कोर्ट से किया। इस बाबत एचटी मीडिया और अन्य की तरफ से कोर्ट में अर्जी भी दी गई थी। कोर्ट ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। प्रतिवादियों की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील निलॉय दासगुप्ता ने कोर्ट को जानकारी दी कि कुछ प्रतिवादियों ने नोटिस 29 मार्च को रिसीव किया है और एक प्रतिवादी के पास अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस समेत सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के आदेश दिए। प्रतिवादियों को अगले चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

 मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 जुलाई तय की गई है। प्रतिवादियों के वकील निलॉय दासगुप्ता ने बाद में बताया कि एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से जो केस दायर किया गया है, उससे संबंधित जो नोटिस प्रतिवादियों के पास भेजा गया है, उसमें कई चीजें मिसिंग हैं। उदाहरण के तौर पर नोटिस के पेज नंबर 117 पर जिस कांपैक्ट डिस्क के होने का उल्लेख किया गया है, वो नदारद है। साथ ही सभी प्रतिवादियों को अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। ऐसे में कोर्ट ने वादियों के वकील को सभी दस्तावेज व कागजात प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वेबसाइट पर वादियों से संबंधित कंटेंट पब्लिश न करने को लेकर जो अनुरोध कोर्ट से किया गया, उसे नामंजूर कर दिया गया। 

यशवंत जी आपके साथ साथ ये हम सभी ब्लागरो की भी जीत है और   मेरा ऐसा  मानना है कि हमें जल्द ही ब्लाग संगठन का निर्माण करना चाहिए जिससे ऐसी  स्थिति से निपटा जा सके 

cg4bhadas.com



भाजपा का घोषणा पत्र


रामनवमी के पावन पर्व पर आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणा-पत्र जारी किया। इस घोषणा-पत्र को जारी करने के मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह,मुरली मनोहर जोशी, वैंकेया नायडू, अरुण जेटली  समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। 
भाजपा अध्यक्ष राजनाथसिंह ने कहा कि चुनाव के मौके पर कई पार्टियाँ अपने घोषणा-पत्र जारी करती हैं लेकिन चुनाव के बाद सब भूल जाती हैं, लेकिन भाजपा का यह घोषणा-पत्र अपनी कथनी और करनी में अंतर नहीं करेगा। 
 भाजपा के घोषणा पत्र के मुख्य बिंद
आतंकवाद से निपटने के‍ लिए पोटा जैसा सख्त कानून
पूरे देश में माओवादियों के खिलाफ लड़ाई छेड़ी जाएगी
लड़कियों के लिए 'नारी लक्ष्मी योजना' पूरे देशभर में 
तीन लाख रुपए सालाना आय वालों के लिए आयकर नहीं 
प्रदूषण से निपटने की योजनाओं को बढ़ावा देने का संकल्प
गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों के लिए 2 रुपए किलो चावल
देश में वरिष्ठ नागरिकों को पूरी तरह आयकर में छूट दी जाएगी
घोषणा पत्र में राम मंदिर का मुद्दा भी
रामसेतु को नहीं टूटने दिया जाएगा
मध्यम वर्ग के लिए सस्ता मकान लोन 
सेना के लिए अलग वेतन आयोग बनाएँगे
अयोध्या में विराट राम मंदिर बनाने का वादा 
देशभर में गुजरात की आईटी नीति लागू की जाएगी
विदेशी बैंकों में जमा कालेधन को वापस लाया जाएगा
आगामी 5 वर्षों में एम्स जैसे 6 अस्पताल बनाने की योजना 
पूरे देश में हर रोज 15 किलोमीटर हाई-वे का निर्माण किया जाएगा
सेना में एक रैंक, एक पेंशन की नीति को लागू करने की योजना 
देशभर में नदियों को जोड़ने वाली योजना पर अमल किया जाएगा
गरीबी रेखा से नीचे पढ़ने वाली हर लड़की को साइकिल दी जाएगी
यात्रा करने वाले बुजुर्गों की आयु सीमा 65 के बजाय 60 वर्ष होगी
कम्प्यूटर की कीमतें कम होंगी, ताकि हर आदमी इसे खरीद सके 
* 2014 तक सबके लिए स्वास्थ्य योजना पर अमल किया जाएगा 
                लोक लुभावन सभी वर्ग के लिए सब कुछ है इस घोषणा पत्र में 

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