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Saturday, February 28, 2009

दो साल में वन विभाग नहीं जान पाया कि वो जंगली भैंसे हैं या घरेलू नस्ल का





बताइए भला अपने कभी ऐसा कुछ सुना है चलो हम है सुनते है
20 हेक्टेयर एरिया को फेंसिंग तार से घेरकर दो भैंसों को रखा गया है जिसका नाम उदंती अभयारण । वे जंगली भैंसे हैं या घरेलू नस्ल के, इसका पता वन अमले को दो साल में भी नहीं लगा दो साल पहले इन जानवरों का डीएनए टेस्ट कराया गया था, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। देवभोग प्रवास के दौरान वन मंत्री श्री उसेंडी ने अधिकारियों से वनभैंसा दिखाने को कहा, तो अधिकारी हड़बड़ा गए। आनन-फानन में अधिकारियों ने उन भैंसों को दिखाया, जिन्हें देखकर मंत्री भौचक्क रह गए। चलो मंत्री महोदय तो पहचान गए की ये वन भैसा नहीं है ,मंत्री महोदय महोदय द्वारा पूछने पर ... जंगली भैंसे हैं या घर के?मौके पर उपस्थित अधिकारी कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए पार्टी कार्यकर्ताओं से जानकारी ली। तब पता चला कि दो साल पहले इनका डीएनए टेस्ट किया गया है। मंत्री ने एसडीओ केएल निर्मलकर और रेंजर मनोज शाह से टेस्ट की रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी, तो वे गोलमोल जवाब देने लगे। अधिकारियों के टालमटोल रवैए से मंत्री ताड़ गए कि मामला गड़बड़ है। जंगली भैंसा देखने की उनकी इच्छा खत्म हो गई

अब इस बात से आप जान लिजीये की छतीसगढ में क्या और किस तरह से चल रहा है
१. दो साल में वन विभाग नहीं जान पाया कि वो जंगली भैंसे हैं या घरेलू नस्ल का
२. आखिर कार बता देते तो उनकी कमाई चली जाती
३. क्या इसतरह से वन विभाग लापरवाही कर सकता है वो भी प्रांतीय प्राणी के लिये
४. अगर वो जंगली भैंसे होता तो जवाब नहीं देते वन विभाग के अधिकारी
५. अगर वो जंगली भैंसे नहीं तो दो साल से उस पर क्या गये खर्च का जिमेदार कौन और भरपाई कौन करेगा
६. इसी तरह से प्रांतीय पक्षी मैना के संरक्षण के लिए कि करोडो रु खर्च किये गए है कही उसका हाल भी एसे ही तो नहीं है
सोचो छत्तीसगढ की जनता की ये क्या हो रहा है

The giving Heart: Finallyyyyy !!!!!!

The giving Heart: Finallyyyyy !!!!!!

Friday, February 27, 2009

अंगद और लोकसभ चुनाव

लोकसभ चुनाव की अधिसुचना के लिए अब कुछ ही दिन शेष है और सभी राजनैतिक दल राष्ट्रीय महापर्व के फाइनल तैयारी में जुट गए है अगर हम छतीसगढ और [रायपुर] की बात करे तो किसी अखबार ने वर्त्तमान सांसद को अंगद से परिभाषित करते हुये लोकसभा चुनाव में उनके पैर उखाड़ने वाले की तलाश है से समांचार प्रकाशीत किया है अंगद से आप सभी परिचित है रामायण काल का यह पात्र किसी परिचय का मोहताज नहीं पर हम उस अंगद की नहीं भाजपाई अंगद की बात कर रहे है अविभाजित मध्य प्रदेश में कभी कांग्रेस का गढ रहा छत्तीसगढ अब अपने ही कांग्रेसी कर्णधारो से परेशान है नाटकिय तोर तरीके से मंचो और पार्टी बैठक में कांग्रेस को आगे लेजाने और प्रदेश में सत्तासीन होने की बात करते और कहते नहीं थकने वाले कांग्रेसीयो का सपना  छतीसगढ   विधान सभा चुनाव में  अधुरा रहा गया यहाँ पर गोरतलब बात यह है की जिस तरह एक से अधिक बुधिमान एक साथ नहीं रह सकते और न किसी दुसरे बुधिमान का प्रतिनिधित्व स्वीकार कर सकते ठीक उसी तरह छत्तीसगढ में भी कांग्रेसीयो ने खुद को बुधिमान मानने की गलती कर ली जो की सच नहीं था और यह बात उनको जनता ने विधानसभा चुनाव में दिखा दिया .
लेकिन करीब से देखे तो और भी बहुत कुछ दिखाई देता है जैसे की जनता तो परिवर्तन चाह्ती थी पर कांग्रेसीयो में नेत्रत्व ही नहीं था या यू कहें की राष्ट्रीय कांग्रेस ने डिवाइड एन रुल पॉलिसी पे ही काम करते हुए सभी को मुखिया बना कर सभी को विधानसभ चुनाव की बागडोर सौप दी जोकि बिना स्टेटेजी के मैदान में दिखाई दिए उनका सामना भाजपा से कम खुद कांग्रेसियो से ज्यादा था इन सब का सपना एक दुसरे को नीचा दीखाते हुये आगे निकलना और छत्तीसगढ की बागडोर हथियांनाथा . इसलिए पांचाली के चरित्र वाली छत्तीसगढ कांग्रेस को जनता ने स्वीकार नहीं किया और यही वजह रही की भाजपा फिर से सता सीन हो गई लेकिन भाजपा को ये गलत फहमी है की उन्होंने ये चुनाव अपने विकास कार्यो के बल बुत्ते जीता ऐसा    वो      समझते है, वो सिर्फ इसलिए जीते क्यो की कांग्रेस हार गई . . .. ....
आये दिन कांग्रेस में कई माध्यमों से बार बार विधानसभ चुनाव की हार के लिए पूर्व मुख्यमंत्री श्री जोगी को जिमेदार ठहराया जाता है ये मै नही कह रहा आये दिन मीडिया  या किसी अन्य    हवाले से जो बात सामने आते रहती है मै उसी को दोहरा रहा हु पर मैं यहाँ उनसे ये पूछना चाहता हू कि  विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के सब दावेदार थे  तो हार के लिए एक व्यक्ति को जिमेदार कैसे ठहराया जा सकता है बहुत हद तक यही बात रायपुर के सम्बन्ध में भी कही जा सकती है जो लोग रायपुर सांसद को अंगद से जोड़ के देख रहे है और प्रोजेक्ट कर रहे है उनक ख्वाब उस समय टूट जायेगा जब चुनाव में उनके अंगद का सामना किसी बाली से हो जायेगा . राजनीती में ही नहीं वरन आम जीवन में भी कई बार लोग बिना बाली का सामना किये खुद को अंगद समझने की गलती कर बैठ्ते है

संपादक
cg4भड़ास.com
लिंकhttp://www.dailychhattisgarh.com/today/Page%202.pdf

Monday, February 23, 2009




Friday, February 20, 2009

आओं ढूंढे छत्तीसगढी लोक संगीत का चोर .....

अभी मैंने न्यूज़ चैनलों में नई फिल्म "दिल्ली ६ " की बहुत सी तारीफ सुनी शीर्षस्थ लोगो ने , जिन्होंने फ़िल्म को १० न देते हुए सरलता सादगी और न जाने बहुत से भारी भरकम शब्दों से पुष्पंम सम्र्परप्यानी करते हुए तारीफों के पुल बान्ध डाले किसी ने यहाँ यह भी कहा कि हर इन्सान में एक अच्छाई जरूर होती है उस अच्छाई को ही फ़िल्म में दिखाने प्रयास किया गया है , उसे पहचान के उसे निखारना चाहिए वगैरा ... वगैरा .. पर मै इन सब में नही पड्ना चाह्ता हो सकता है की फ़िल्म अच्छी भी हो तारीफ़ के काबिल भी को पर मै आज सारे छत्तीसगढ़ की और से उनसे यही पूछना चाह्ता हुं की "दिल्ली ६ " में एक संगीत सुनने मिल रहा है वह कहा से है
संगीत :- सास गारी देथे ननद गारी देथे , करार गौदा फुल ..........
अगर उनके पास जवाब हो तो मुझे जरूर बताये , वो छत्तीसगढी भाषा में है इससे तो इंकार नही किय जा सकता इसका मतलब साफ है की वो छत्तीसगढ़ के लोक संगीत से लिया गया है, तो कहो हा की यह छत्तीसगढी लोकसंगीत से लिया गया है इसमे हर्ज क्या है सीधे-साधे बेचारे छत्तीसगढी उस गाने की सफ़लता में हिस्सा नही मांग रहे वो तो बस ये कह रहे है की छत्तीसगढी लोक संगीत से लिया है और जो सच भी है तो बस आप उसमे उल्लेख करे की छत्तीसगढी लोकसंगीत से है लेकिन उन बेचारो को वो नाम भी नही मिल रहा।
मै बताता हु की वो छत्तीसगढी कैसे लोग है बड़े शहर से तो उनका दूर दूर तक कोई नाता नही है उनमे से कुछ ने तो शायद जहां वो गाना गाया गया , बना उस शहर नाम भी ना सुना हो, ये इतने सीधे लोग है जो कभी अपने बच्चे को बड़ी खिलोंनो की दुकाने के रास्ते से इसलिए नही ले जाते कि उनका बच्चा कभी खिलोंनो की दुकान देख खिलोंनो की फरमाइश न कर दे , नून और चाऊँर में सारी जिन्दगी निकाल देते है यही वजह है की चाँवल वाले बाबा ने ने इसका भरपूर फायदा उठाया और सत्ता में काबिज है । इतने सीधे लोग है ये तो भला बताईये कि उन्हें क्या पता की वो अपने लोक संगीत को रजिस्ट्र्ड करा ले उन्होंने गा दिया और गुनगुनाते रहे यही सोच के की ये हमारे आलावा किसी और के काम का नही पर उन्हें क्या पता छत्तीसगढी लोकसंगीत जिसे घर घर में गुनगुनाया जाता है सावन में [हल ] नागर जोतते हुये इसी लोकसंगीत को वो गुनगुनते हुए दू एक्ड जमींन अकेले बैल के साथ जोंत देता था । पर अब वो बीती दिनों की बात हो गई अब तो इस लोकसंगीत को फ़िल्म में लिया जा चुका है और अब उसी गाने के बजाने पर आपको रायल्टी संगीत कम्पनी को देनी होगी तो ये है किस्मत का फेरा जिसने गाना लिखा बनाया वे कभी कभी छत्तीसगढ में अन्दुरुनी ग्रामीण अंचलो मे छत्तीसगढी कार्यकर्म कर लेते थे जिससे उनकी दाल रोटी चल जाती थी अब संगीतकार और कम्पनी का लेबल लगने से वो भी जाती रही तो छतीसगढ वालो सावधान हो जावो और जो भी इस तरह के गीत,संगीत, लोकसंगीत जिन्होंने भी छतीसगढ , छत्तीसगढी में जिस किसी ने गाया है उसे रजिस्ट्र्ड करा ले क्यो कि अब "दिल्ली ६ " में छत्तीसगढी लोकसंगीत कि सफलता के बाद ओँर भी इस तरह लोक लोभावन छत्तीसगढी लोकसंगीत तोड मरोड़ के अपने नाम से फिल्म में दिखने की प्रथा की शुरुवात हो चूकी है और अगर किसी को .....
संगीत :- सास गारी देथे ननद गारी देथे , करार गौदा फुल ..........
छात्तिसगाढी लोक संगीत का चोर ..... मिले तो वो जरुर उसे उसके मूळ रचियता से मिलवा दे ।

लोकसभ चुनाव उमीद्दवार - ब्लाग से

लोकसभ चुनाव के नजदीक आते ही आए दिन मीडिया के हवाले से नए चेहरों कि चुनावी मैदानों में उतरने कि पुष्टि हो रही ही है फ़िर वो फ़िल्म जगत से संजय द्त्त हो या फ़िर क्रिकेट से बाहर का रास्ता दिखाए हुए अजहर ऊद्दीन लेकिन मेरी परेशानी कुछ और है ओँर यह है कि कही कल मुझे उसी मीडिया के हवाले से दो और नए चेहरे यशवंत जी http://bhadas4media.com और पुण्य प्रसून बाजपेयी जी http://prasunbajpai.itzmyblog.com/ चुनावी समर में उतरने वाले है की खबर लगे तो मुझे आश्चर्य नही होना चाहिए। क्या हुआ आप चोंक क्यो रहे है अच्छा आपको नही पता कि ये कोंन है चलो हम बता देते है कि एक है यशवंत जी [ जिन्होंने मीडिया ४ भड़ास के माध्यम से मीडिया की गंदगी दूर करने का बीडा उठा रखा है ] और दुसरे श्री बाजपेयी जी जिन्हें आपने राष्ट्रीय न्यूज़ चनेलो में देखा होगा [ जिन्होंने न्यूज़ में रहते हुए समज को बदलने का बीडा उठाया है ] तो अब आप दोनों श्रीयुत को पहचान ही गए होगे हां मै इन्ही उपरोक्त श्रीयुत कि बात कर रहा हुं मै भी इन्हे व्यक्तिगत तौर पे तो नही जानता महज ब्लाग से ही परिचय और पहचान है । पर देखे तो आप और मै तो देश के अन्य नेताओ को भी व्यक्तिगत तौर पे नही जानते बस न्यूज़ चनेलो के जरिये ही परिचय है तो मेरे ख्याल से उपरोक्त श्रीयुत उन अन्य भारतीय राजनेताओं से तो हमारे ज्यादा करीब हुए और इनकी दुरियां देखे तो भारतीय नेताओ से ज्यादा हो नही सकती तो मै तो सहमत हु की ये मेरे मतानुसार लोकसभा के लोकप्रिय तो नही पर कामगार प्रत्याशी साबित जरुर होगे । मै आपसे कह रहा था कि कल अगर आपको इनमे से किसी नाम की चुनावी समर में उतरने कि खबर किसी माध्यम से मिले तो आश्चर्य नही करिएगा क्योकि जिस तरह से इस लोक सभा चुनाव में बहुत से नये चहरे जिन्होंने जानता के बीच किसी भी प्रतिभा से अपनी पहचान बनाई, फ़िर वो खेल हो या हिन्दी फिल्म या फ़िर कोई और भी प्रतिभा से जुडा व्यक्ति जो अपनी प्रतीभ से जानता तक अपनी पकड़, पहुँच रखता है वे सभी चुनाव में दो दो हाथ करने तैयार है तो मेरे अनुसार तो यशवंत जी और बाजपेयी जी को भी चुनावी मैदान में आ ही जाना चाहिए। जीत गए तो अन्य खेल और फिल्मी हस्तियों से ज्यादा ही समय वे देश और जनता के साथ बितायेगे ऐसा मेरा मानन है ।अपने प्रत्याशी अन्य डबल पर्सनाल्टी मैन से तो अलग है जैस कि आप सभी देख ही रहे होगे । जिन्हें किसी ने कहा कि आवो भाई चुनाव लडो सो उन्होने चुनाव लड़ा और जीतने के बाद अपने घर और प्रोफेशन में वापस तो भइया इससे तो अच्छे है हमारे उमीदवार ओँर अब तो लोकसभा और विधान सभा में ऐसे ही डबल पर्सनाल्टी मैन ही मिलेगे जो काम के होते हुए भी शौक से विधयाक और सांसद बन जाते है । अब वो समय भी आ गया है कि सरकारी नोकरी कि तरह ही अब राजनीति मे भी आने वाले के लिए पात्रता और किसी दुसरे पेशे में नही होने कि पाबंदी लगा देनी चाहिए। पर मै अपने ऊपर ख़ुद ही पाबंदी भी तो नही लगा सकता ना यही हाल अपने देश के राजनेताओँ का है । जैस आप देख रहे है कि सत्यम को बचाने सरकारी पैकेज से लेकर राजनेताओँ ने सारी ताकत झोंक दी है लेकिन आप और हम कही कभी ऐसे फ़ँस जाते तो कोई सरकारी मदद आपको और हमको नही मिलती , मिलता तो बस यही कि हम या तो जमानत के लिए घूम रहे होते या जेल में होते, हो सकता है हमारे नेता ऐसा कर ख़ुद की मदद कर रहे हो ये मेरा अपना नजरिया है। मै बात कर रहा था की राजनीति में नये चेहरो की तो आप को एक बात और बता दू की वैसे तो देश के बुद्धिजीवी और अन्य प्रतिभा को भी संसद में प्रतिनिधित्व दिया गया है जिसका रास्ता राज्य सभा सदस्य से हो कर जाता है जिसक सीधा मतलब था की देश के प्रतिभावान व्याक्तित्व जो देश की प्रगति में सहायक हो सकते है, ऐसे बुद्धिजीवी जो राजनीति से ना होकर अन्य क्षेत्रो से जुडे हो और वे चुनाव भी नही लड़ना चाहते पर उनकी जरूरत देश और समाज को है जिसमे सभी अलग क्षेत्रो से जुड़े लोगो के ससद में प्रतीनिधित्व की व्यवस्था की गई है पर वर्तमान में उस भी चापलुसो और कुबेर पुत्र काबीज है तो एसे में मुझे कल किसी न्यूज़ चैनेल या अखबार से ख़बर मिले इससे पहले ही हम ब्लागर की ओर से मै दो नामों का प्रस्ताव आगामी लोक सभा उमीदवार के रुप में प्रस्तावित करता हुँ की इन्हे भी चुनाव में उतरना चाहिए क्यो की जहा तक मेरी जानकारी है इन महाशयों की ब्लाग पढ़ के , ब्लाग पढने वालो की दशा , दिशा और विचार बदल जाते है तो देश के दिशा क्यो नही , ओर एक खास बात , ओर राजनेताओ की तरह जनता को बेव्खुफ़ बनाना इन्हे अभी नही आता है । शायद यही वजह है की ये यहाँ हमारे साथ हमारे बीच है ।

Wednesday, February 18, 2009

न्योता, छतीसगढ के सभी भाडासियो को ....मतलब जोर से कहो, खुल के कहो...

जय जय छतीसगढ कि दरअसल CG4भड़ास.com हम लोगों के लिए एक ऐसी जगह है जहां पर लगता है कि हम सभी अपने दिल की भाषा में बात कर सकते हैं । वो जो चीजें हम हर रोज आस पास देखते या महसूस करते हैं पर कह नहीं पा रहे हैं। वो बातें जो किसी से कहना चाहते हैं लेकिन किससे कहे कोई सुनता  ही नही हैं ।
तो लीजिए सदस्य बनिये CG4भड़ास.com का, यह मंच आप सभी के विचरों का इंतजार कर रहा हैं जहाँ कोई भी दस्तक दे सकता है और अपनी भड़ास निकाल सकता जिसका सम्बन्ध छत्तीसगढ,  जनता , अधिकारी या फ़िर  आप हम सभी में से किसी से हो।   हा .... भड़ास तो देने का मंच है। मुक्ति देने का, सहजता देने का, सरसता देना का, एकजुटता देने का....दिशा देने का। सो  भेज रहा हूं न्योता,सभी छत्तीसगढ के चाहने वाले को कि भड़ासी बनिए....मतलब जोर से कहो, खुल के कहो...जय छत्तीसगढ की , आओ बनाएं एक बेहतर छतीसगढ । इस बार वाकई हम सभी भड़ासी छतीसगढ के विकास के लिए एक नई क्रांति की बुनियाद रखने वाले हैं, वो है सूचना और जानने की क्रांति का अधिकार का। हर रोज छत्तीसगढ में इतनी सारी चीजें हो रही हैं कि उन्हें बताने वाला कोई नहीं है। छत्तीसगढ के सभी ऑनलाइन, आंफ़लाइन और इंटरनेट उपयोगकर्ता  साथियों से आह्वान है कि वो CG4भड़ास.com  से जुड़ें और इस सकारात्मक और सर्वहिताय आंदोलन को आगे बढ़ाएं और आप में से किसी को कोई भी पक्की खबर पता हो तो उसे cg4भड़ास मेल आईडी पर मेल कर दें।
अगर आप सही करते हैं, दयालु हैं, दूसरों का भला करते हैं, मन में कोई पाप नहीं रखते, दिल में कोई बात नहीं रखते तो आप तो संत की ही तरह हैं। संत होता क्या है, सबसे बेहतर मनुष्य ही संत होता है तो फिर अगर छत्तीसगढ से जुड़ी  भड़ास निकाल के संतईता की ओर जाया जा सकता हैं तो जाना चाहिए जिससे अपने प्रदेश का हित और विकास  हो सकता हैं । आखिर किसका मन नहीं करता कि वो दिल दिमाग और आत्मा से स्वस्थ, सुंदर और समृद्ध रहे। तो फिर cg4भड़ास.com पर छत्तीसगढ से जुड़ी  अपने अंदर के कूड़े-करकट  को निकालने , पर्सनाल्टी को रिलीज करने के लिए यह  मंच है छतीसगढ को प्रगित के पथ पर ले  जाने के लिए ये आवश्यक है , मन को सुंदर और उन्मुक्त बनाओ....छत्तीसगढ से जुड़ी सभी बाते, विचार, भड़ास या सुझाव CG4भड़ास.com में लिखा भेजे.

Tuesday, February 17, 2009

आप शब्दों से भड़ास निकलना चाहते है, आपका स्वागत है!!!

आप सभी को cg4bhdas.com से जुड़ने के लिए धन्यवाद , हम आपके और भी आभारी होगे अगर आप छत्तीसगढ से जुड़ी वो सभी बाते जो आपने अपने मन में दबा राखी है या फ़िर आप कुछ कहना चाहते है जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समबन्ध आप और हमसे है तो कह दीजिये आप शब्दों से भड़ास निकलना चाह्ते है तो आपका स्वागत है , न जीने देने के लिए एक लाख बहाने होते हैं, और जीने के लिए कोई मौका नहीं। वो तो आप पर है, कैसे और किस तरह जीने के लिए वक्त चुरा पाते हैं। आज के भागमभाग, हायहाय, मोलतोल, गोलमोल....के दौर में कुछ भी साफ, सहज और सुंदर रह पाना कहां मुमकिन है। जो भव्य और सुंदर और सहज दिखाया व बताया जाता है,उसके गहरे पैठो, को पता करो तो वो झूठ की नींव पर खड़ा, साजिश की नींव पर तैयार नजर आएगा। ऐसे में हम-आप कहां जाएं,जो बचपन से किताबों और बातों और जीवन में पढ़ते-सुनते-जीते आए हैं- कि सच्चाई , सहजता, सरलता और प्रकृति प्रदत्त सुंदरता है ,इसमे हो रही मिलावट को मिलावट को कैसे रोके । हमारे आस पास जो चल रह है उसे देख कर न चाह्ते हुए भी कुछ कहने का मन करता है बस वही है भड़ास , cg4भड़ास उन आम छत्तीसगढीयों कि आवाज है जो आनलाइन या आफलाइन, माध्यम से जुड़े हैं मसलन अखबार, टीवी और मैग्जीन आदि से संबद्ध हैं। ये उनकी भी आवाज है जो दिल में एक सुंदर छतीसगढ बनाने की हसरत रखे है और हां, याद रखिए, बहुत मुश्किल होता है भड़ास निकालना, खुलकर बोल देना, सब कुछ कह देना....और जो ऐसा करते हैं, वो जीवन को साहस, सहजता और सुन्दरता के साथ जीने प्रयास कर रहे है
((आप अपनी भड़ास, राय, सवाल या सुझाव मुझे cg4bhadas@gmail.com
commentcg4@gmail.com

पर भेज सकते हैं))

Sunday, February 15, 2009

Friday, February 13, 2009

छत्तीसगढ़ को रेल बजट में लालू ने दिखाय ठेगा ... आपके जवाब ......

इन प्रस्तावों पर ठेंगा
कोरबा-मुंबई साप्ताहिक एक्सप्रेसअंबिकापुर-जबलपुर डेली पैसेंजरबालाघाट-कटंगी डेली पैसेंजरगोंदिया-कटंगी पैसेंजर को बलारशाह तकबिलासपुर-पेंड्रारोड पैसेंजर को अनूपपुर तकनई-दिल्ली राजधानी को हावड़ा तकदुर्ग-छपरा सारनाथ को मुज्जफरपुर तकवेंनगाना एक्सप्रेस को सप्ताह में दो दिनबिलासपुर-पुणो को सप्ताह में दो दिनत्रिवेंद्रम-कोरबा एक्सप्रेस को चार दिनपुरी-जोधपुर एक्सप्रेस को हफ्ते में दो दिन
छत्तीसगढ़ को सिर्फ दो नई ट्रेनें
* बिलासपुर-तिरूनेवेली एक्सप्रेस (व्हाया त्रिवेंद्रम) सप्ताह में 3 दिन* दुर्ग-जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह - रेल बजट में छत्तीसगढ़ की जनता को छला गया है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा पेश किए गए रेल बजट पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में कहा है कि संयुक्त प्रगितशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार ने अपने कार्यकाल के पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी अपने रेल बजट में छत्तीसगढ़ की दो करोड़ से अधिक जनता को निराश किया है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस बार के रेल बजट में भी छत्तीसगढ़ के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसका दिल खोलकर स्वागत किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर इस बार के रेल बजट में भी यूपीए की केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की जनता को छला गया है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि लालू यादव के रेल बजट में छत्तीसगढ़ इस बार फिर उपेक्षित रह गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे को देश में सबसे ज्यादा राजस्व छत्तीसगढ़ देता है। इसके बावजूद इस नये राज्य को लालू यादव के रेल बजट में हमेशा की तरह इस बार भी उपेक्षित रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर-धमतरी नेरो गेज लाइन को ब्राड गेज में बदलने, दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन निर्माण से संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और अम्बिकापुर-बरवाडीह लाइन विस्तार की वर्षों पुरानी मांग को रेल मंत्री ने इस बार भी नजरअंदाज कर दिया है।

छत्तीसगढ़ रेल बजट का सबसे बड़ा शेयर देने वाला राज्य है। अकेला बिलासपुर ही बजट का 9वां हिस्सा देता है। भारत का सबसे ज्यादा खनिज संसाधनों वाला यह राज्य देश के मध्य में स्थित होने के कारण रेलवे को माल परिवहन भाड़े का भी सबसे ज्यादा हिस्सा देता है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ को पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार और प्रदेश की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के संबंध में उन्होंने लगातार कई बार केन्द्रीय रेल मंत्री से चर्चा की, ज्ञापन सौंपे और व्यक्तिगत तौर पर आग्रह भी किया लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर-राजनांदगांव रेल लाइन का सर्वे अंग्रेजों के समय हुआ था, लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

Thursday, February 12, 2009

छत्तीसगढ - लोकसभा चुनाव २००९

वैस तो हर ५ साल में लोकसभा चुनाव होते है पर २००९ के लोकसभा चुनाव कई मामलो में पूर्व में सम्पन्न चुनावों से अलग होगे देश में चल रही अंदुरनी कलह , मंदी का दौर, ऊपर से आतंकवाद जसे बड़े मुद्दे तो होगे ही एसे में देश की बागडोर किस राजनैतिक दल को मिलता है या फ़िर वही मिली जुली सरकार के पास जाती है देखने वाली बात होगी लेकिन छत्तीसगढ में भी इस लोक सभा चुनाव में अप्रत्याशित रिजल्ट की बात कहे तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी क्यो कि वर्ष २००९ के लोकसभा चुनाव में 18 साल पूरा करने वाली नई पीढ़ी प्रदेश के कर्णधारों का चयन करने को बेताब है। खनिज के मामले में सबसे धनाढ्य माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में 40 प्रतिशत नई पौध अपने वोट से सरकार चुनने के लिए तैयार है।
राज्य के कुल मतदाताओं में से 3 लाख यानी लगभग 2 फीसदी लोग पहली बार सरकार चुनने बूथ तक जाएंगे। 30 सितंबर तक नई वोटर लिस्ट बनने के बाद इस संख्या में इजाफा हो सकता है। यही वजह है की कांग्रेस से लेकर भाजपा और अन्य दल में युवाओं की इच्छानुसार युवा प्रत्याशी की खोज जोर शोर से की जा रही है जिसेसे वह युवा जो पहली दफा वोट देंगे उनमे ज्यादा से ज्यादा पकड बना कर लोकसभा के चुनावी समर को पार लगया जा सके।
राज्य में 18 से 25 साल के मतदाताओं जो ज्यादातर कालेज स्टूडेंट हैं। इनकी संख्या करीब 25 लाख है। यह कुल मतदाताओं का 20 फीसदी है। इसी तरह 25 से 35 वर्ष वाले युवा मतदाता जो नौकरी भी करते हैं करीब उतने ही हैं। दोनों मिलाकर कुल मतदाओं का 40 प्रतिशत होता है। यह आंकड़ा किसी भी
दल को सत्ता सौंपने या बेदखल करने के लिए काफी माना जा सकता है।वर्ष 2003 में युवा मतदाताओं की कुल संख्या 1,35,41,199 थी जबकि यह संख्या बढ़कर अब 1,52,58,881 हो गई है।

भावी प्रधानमंत्री के सपने :- भावी प्रधानमंत्री का सपना सजोये भाजपा ने अपना उम्मीदवार लालक्रष्ण आडवानी को सेनापति बना के लोकसभा समर में उतने की पुरी तैयारी कर ली है वही कांग्रेस ने भी कांग्रेस युवराज राहुल बाबा के साथ कुछ सपने सजोये है लेकिन श्री आडवानी ने यह भाप लिया की आगामी चुनाव में सब राजनैतिक चुनावी प्रचार प्रसर उपायों में २ उपाय और भी है १ युवा मत्तदाता २ इनरनेट [ सुलभ पहुच सेवा ] जिससे सीधा युवा मत्तदाता जुड़े है यही वजह है की चुनावी तिथि के शंखनाद के पूर्व ही आडवानी जी 18 से 25 साल के मतदाताओं जो ज्यादातर कालेज स्टूडेंट हैं और
इसी तरह 25 से 35 वर्ष वाले युवा मतदाता जो नौकरी भी करते हैं करीब उतने ही हैं। दोनों ही इंटरनेट के बहुत करीब है उनके करीब आने अडवाणी जी चैटीग के जरिये युवांओ के प्रश्नों के ऊतर दे रहे है तो कही इंटरनेट में ही घरोंदा बना कर भाजपा का ऑफिस खोल लिया है

इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका होगी २००९ लोकसभा चुनाव में :- शुरवाती समय तक इंटरनेट महज मनोरंजन या फ़िर एक विकल्प मात्र था लेकिन समय बदला और इंटरनेट सुचना, संचार में सबसे पहले स्थान पर पहुच गया है जहां वो अब चुनाव या अन्य मामलो अभिव्यक्ति के लिए सलुभ और सफल है और युवा वर्ग की पसंद भी है यही वजह है की आज इंटरनेट का उपयोग नेता भी चुनाव के लिए कर रहे है मुझे कोई हैरानी नही होगी की अभी एका - एका मै श्री आडवानी जी से या फ़िर छतीसगढ के मुख्यमंत्री से ऑनलाइन बात कर रहा हु
वैस अभी हमारा प्रदेश इस परम्परा में थोड़ा पीछे है वो अभी sms तक ही सीमित है पर जनता तो आगे निकल गई है बहुतायत जनता का वास्ता या तो इंटरनेट से पड़ता ही रहता है या फ़िर वो इसके नियमित उपभोक्ता है और इंटरनेट के चहेते 18 से 25 साल के मतदाताओं की बात करे तो , जो ज्यादातर कालेज स्टूडेंट हैं पहली बार अपने वोट से सरकार चुनने के लिए तैयार है और किसी भी दल सत्ता सौंपने या बेदखल करने माद्दा रखते है । इस लिए भी इंटरनेट का महत्व इस लोकसभा चुनाव में बढ़ जाएगा

छत्तीसगढ - नेता, अधिकारी मस्त जनता पस्त

नेता, अधिकारी मस्त , जनता पस्त यही हाल है छत्तीसगढ का

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http://cg4bhadas.com

Tuesday, February 10, 2009

Cg Citizen Journalism

चौबीस घंटे  खबरिया चैनलों के होने और आए दिन थोक के भावों में अखबारों के संस्करण निकलने के वाबजूद खबरों का एक बड़ा कोना इन सबसे छूट जाता है। स्थानीय घटनाओं को लेकर उनके अपने विजुअल्स होते होगे। लेकिन इंटरनेट के भीतर आनलाइन माध्यम या आफलाइन से जुड़े एक नए वर्ग का उदय तेजी से हो रहा है जो पहले के वर्ग से बिल्कुल अलग है। ये वर्ग इंटरनेट - ब्लॉग के जरिए पत्रकारिता का काम कर रहा है। मीडिया का एक नया रुप है,विभिन्न मसलों पर नए तरीके से बात करते हैं,अपने तर्क रखते हैं ओर अपना नजरिया रखते है और उनके अपने छेत्र की अपनी समस्याये और अपने मुद्दे होते है आप सभी के पास भी ख़ुद से जुटायी ऑथेंटिक सामग्रियों का का भंडार होता है। ये सारी सामग्री संभवतः कि किसी रिपोर्टर द्वारा जुटायी सामग्री से ज्यादा ऑथेंटिक होती है। आपकी इस अभिव्यक्ति को ही हमने Cg Citizen Journalism.
 The All Cg Citizen is Journalist"! का नाम दिया है। आप सब हर दिन अपने आस पास कुछ ना कुछ ऐसा देखते है जो आपको विभिन्न राजनैतीक नजरिये से अलग सोचने समझने पर मजबूर करता है और नये मुद्दे आपके सामने होते है ,आपकी उन्ही सोच को हम cg4bhadas.com के माध्यम से "अपनी बात सत्ता के सियासत दानो के साथ" सामने रखने का प्रयास करेगे। इस लिए छत्तीसगढ के हर वो नागरिक जो अपने आस पास घट रही कोई भी धटना या उसके तथ्यात्मक साबुत जिसे आप जनता के साथ मिल कर प्रदेश में बदलाव चाहते है तो बस हमें मेल कर दीजिये और कहते रहिये वो सब जिसमे आप बदलाव चाहते है,जिसमे आप सुधार करना चाहते है आज नही तो कल वो दिन दिन जरुर आएगा जब आपके विचरो से परिवर्तन की शुरुवात होगी।

Monday, February 2, 2009

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